दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्‍ट्र मंडल के ऑनलाइन बाल संस्‍कार शिविर का समापन 6 जून को

0- 11 जून को मंडल के संत ज्ञानेश्‍वर सभागृह में आॅनलाइन समारोह में बच्‍चे मंच पर करेंगे योगासन 

रायपुर। महाराष्‍ट्र मंडल की आध्‍यात्मिक समिति की ओर से एक मई से जारी ऑनलाइन बाल संस्‍कार शिविर का समापन सवा महीने के बाद शक्रवार, 6 जून को होगा। लगभग 125 बच्‍चों वाले शिविर में बच्‍चों को सुबह प्रार्थना, योग के विभिन्‍न आसन, राम रक्षा स्‍त्रोत, हनुमान चालीसा, विष्‍णु सहस्‍त्र नाम गीता का 12वां अध्‍याय सहित विविध मंत्रोच्‍चार और उसका अर्थ सिखाया गया। ऑनलाइन शिविर में बच्‍चों को संस्‍कार सिखाने के अलावा ड्राइंग, पेंटिंग, संगीत समेत उनकी रुचि से जुड़ी बातें भी बताई गईं।
आध्‍यात्मिक समिति की समन्‍वयक आस्‍था अभय काले ने बताया कि ऑनलाइन बाल संस्‍कार शिविर के विधिवत समापन की घोषणा 11 जून को महाराष्‍ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्‍वर सभागृह में भव्‍य आयोजन के साथ की जाएगी। इसमें शिविर में शामिल रायपुर के बच्‍चे मंच पर योग के विभिन्‍न आसन करके दिखाएंगे। इसके साथ ही राम रक्षा स्‍त्रोत सहित विविध मंत्रोच्‍चार भी बच्‍चों के मुखवृंद से सुनने को मिलेंगे।   
बाल संस्कार शिविर को लेकर महाराष्‍ट्र मंडल में बच्‍चों के अभिभावक लगातार अपने फीडबैक दे रहे हैं। इनमें सुवर्णा मयंक पतंगीवार के अनुसार आपके शिविर से हमारे बच्‍चों को काफी कुछ सीखने को मिला। शिविर से बच्चों को हमारी संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा मिल रही है। भूषण कुलकर्णी के शब्‍दों में ‘यह क्‍लास बहुत अच्‍छा माध्‍यम है हमारे बच्‍चों को हिंदू संस्‍कृति के बारे में जानकारी देने का। सबसे अच्‍छी बात यह है कि बच्‍चे महीने भर क्‍लास को लेकर एक्‍साइटेड रहे और स्‍वयं ही लॉगइन करके क्‍लास ज्‍वाइन करते रहे। लेटेस्‍ट टॉपिक पहलगाम हमला- ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी बच्‍चों को दी गई।  
अभिजीत सिंह और ऋतिका सिंह चंदेल ने भी अनघट सिंह चंदेल के ऑनलाइन बाल संस्‍कार शिविर में सीखे गए योग, संस्‍कार और मंत्रोच्‍चार को लेकर कृतज्ञता व्‍यक्‍त की। प्रसन्न खंगन के अभिभावक कहते हैं कि शिविर में बच्चों को हिंदू संस्कृति से को बहुत अच्छे से समझाया गया। सारे श्लोक कंठस्थ कराए गए। घर में माता- पिता और बड़ों का सम्मान करना सिखाया गया। शिविर में सभी की मेहनत और समर्पण प्रशंसनीय है।
तात्‍यापारा निवासी वेदिका पंडित की मां दीपिका और पिता विवेक पंडित ने भी ऑनलाइन बाल संस्‍कार शिविर को लेकर आभार जताया है। पर्यु काशीकर के अभिभावक अभिमन्‍यु व पल्‍लवी काशीकर और प्रशस्ति आकांत के माता- पिता शिल्‍पा और प्रसाद आकांत शिविर के संदर्भ में कहते हैं कि मंजू ताई सभी श्लोकों को बहुत अच्छे से पढ़ाती हैं। वह सभी बच्चों से उन्हें दोहराने भी बोलतीं हैं। बच्चे अपनी बारी का इंतजार करते हुए इसका भरपूर आनंद लेते हैं। योग और ड्राइंग क्लास भी बहुत मजेदार रहा। 
श्वेता आनंद कुसरे अपने बेटे अर्णव का बौद्धिक विकास देखकर ऑनलाइन बाल संस्‍कार शिविर के संदर्भ में कहतीं हैं कि इसमें बच्चों को आध्यात्मिक, पौराणिक, देश-विदेश की जानकारी देने, रोचक गेम्स, सभी धर्म- त्योहारों की जानकारी देने, कला, संगीत, योग, सामान्य ज्ञान और भारतीय संस्कृति की जानकारी देने, वर्तमान समय में देश-विदेश की जानकारी उपलब्‍ध कराने के अलावा रोचक कहानियों के माध्यम से सीख देना, संस्कृत के श्लोक भावार्थ सहित रामरक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा, विष्णु शास्त्र नामावली, विभिन्न श्लोक कंठस्थ कराए गए, जो तारीफ योग्य है। इन सब से संबंधित प्रश्नोत्तरी भी करवाई गई, जो बच्चों की स्मरणशक्ति बढ़ाने में लाभदायक है। 
अभिज्ञान और प्राची राजवाडे के पिता दत्‍ता प्रसन्‍ना और मां दीपाली राजवाडे ने कहा कि बच्चे इस शिविर में स्तोत्र एवं प्रेरक कहानियों के माध्यम से ज्ञानवर्धन कर रहे है। साथ ही योग द्वारा उन्हें शारीरिक स्वास्थ्य के महत्व का भी ज्ञान मिल रहा है। पुणे निवासी राघव कुकडे की मां राधिका व पिता समीर कुकडे कहते हैं कि बाल संस्‍कार शिविर से बच्‍चे अलग-अलग संस्कार सीख रहे हैं। अवनिश कुकडे ने पिता रौनक और मां अपर्णा कुकडे ने भी शिविर को बच्‍चों के लिए अनिवार्य बताया।