पढ़ाई के दौरान बच्चों को आसानी से समझ में आने वाली भाषा में हो संवाद
2025-06-09 04:38 PM
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- संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में कम्युनिकेशन स्किल पर कार्यशाला का हुआ आयोजन
- नया शिक्षण सत्र शुरू होने के पूर्व प्रा.अनिल काळेले ने किया शिक्षकों का मार्गदर्शन
रायपुर। शिक्षक, राजनेता, अभिनेता, टीम लीडर की पहचान उनकी कम्युनिकेशन स्किल यानी संचार कौशल से होती है। अगर आपके पास अच्छी कम्युनिकेशन स्किल नहीं है तो आप अन्य लोगों से पीछे रह जाएंगे। आपकी कम्युनिकेशन स्किल अच्छी है तो आप अपनी बातें बहुत ही सरलता से सामने वाले को बता सकते है। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप सामने वाले से उसी स्किल से बात करें जो उसे आसानी से समझ आए। शिक्षकों को बच्चों के साथ उस भाषा का अधिक प्रयोग करना चाहिए जो बच्चों को आसानी से समझ में आ सके। उक्त बातें महाराष्ट्र नाट्य मंडल के डायरेक्टर अनिल श्रीराम काळेले ने संत ज्ञानेश्वर स्कूल में कम्युनिकेशन स्किल्स पर आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
काळेले ने स्कूल के नए शिक्षण सत्र के प्रारंभ से पहले शिक्षकों के लिए आयोजित कम्युनिकेशन स्किल्स प्रोग्राम में कहा कि विचार, भावना और ज्ञान का प्रदर्शन ही कम्युनिकेशन कहलाता है। आप किसी बात को कितने प्रभावी ढंग से कहते हैं, यह बेहद जरूरी होता है। आसानी से समझ में आने वाली भाषा में कम्युनिकेशन हो, यह जरूरी है। आप जरूर इंग्लिम मीडियम स्कूल में पढ़ा रहे है, लेकिन बच्चों को समझाने के लिए आपको हिंदी के साथ लोकल बोली छत्तीसगढ़ी, या अन्य किसी छात्र को समझाने के लिए मराठी, बंगाली में भी संवाद करना पड़े तो यह कहीं भी गलत नहीं है।
काळेले ने कहा कि कम्युनिकेशन को हिंदी में संचार या सम्प्रेक्षण कहते हैं। कम्युनिकेशन का अर्थ होता है विचार, भावना और ज्ञान की सूचनाओं का आदान-प्रदान। कम्युनिकेशन स्किल्स इंसान के व्यक्तित्व का अभिन्न अंग है। कम्युनिकेशन का मतलब है आप अपनी बात को लोगों के सामने कितने प्रभावी रूप से सामने रखते हैं। उन्होंने कहा कि कम्युनिकेशन को प्रभावी बनाने के लिए हमें पांच चीजों का ध्यान रखना चाहिए कब, कहां, कैसे, किससे और क्यों। कम्युनिकेशन स्किल के अन्य भाग भी है जैसे शब्द, वाक्य, भाषा, उच्चारण, व्यक्तित्व या पर्सनालिटी। उन्होंने पर्सनालिटी डेवलपमेंट में एनवायरमेंट एक्सपीरियंस तथा एजुकेशन के योगदान पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि कम्युनिकेशन स्किल्स का तीन भागों में विभक्त किया गया है। मौखिक संचार (वरबल कम्युनिकेशन स्किल्स ), लिखित संचार (रिटन कम्युनिकेशन स्किल्स) और अमौखिक संचार (नान वरबल कम्युनिकेशन स्किल्स)। मौखिक संचार यानी वर्बल कम्युनिकेशन स्किल्स एक ऐसी संचार प्रणाली है जिसमें हम एक या एक से अधिक लोगों से बात करके संदेश का सम्प्रेक्षण करते हैं। क्लास रूम में बच्चों को पढ़ाने के समय इस स्किल्स का अच्छा होना बेहद जरूरी है। लिखित संचार का मतलब अपनी बात को लिखित रूप से समझाना आपके लिखने की कला व्यक्तित्व को प्रभावित कर सकती है। बोर्ड में लिखकर अगर आप बच्चों को कुछ समझा रहे हैं, तो आपकी लिखावट बहुत महत्व रखती है। वहीं अमौखिक संचार के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें आप अपनी बॉडी लैंग्वेज के द्वारा किसी से बातचीत करते हैं। उसे अपनी बॉडी लैंग्वेज से अपनी बात को मनवाना नॉन वर्बल कम्युनिकेशन स्किल्स कहलाता है। बॉडी लैंग्वेज से आपकी पर्सनैलिटी का अंदाजा लगाया जाता है। इसलिए क्लास रूम ही नहीं जीवन के हर क्षण में आपकी बॉडी लैंग्वेज अच्छा होना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका अपर्णा आठले ने किया। कार्यक्रम के दौरान स्कूल प्रभारी परितोष डोनगांवकर, प्राचार्य मनीष गोवर्धन, उप्राचार्य राहुल वोडीतेलवार तथा समस्त टीचिंग स्टाफ उपस्थित रहे।