एनर्जी का पंप हाउस है स्टाफ और मीटिंग रूमः मुकेश शाह
- संत ज्ञानेश्वर स्कूल में आयोजित कार्यशाला में पहुंचे शिक्षाविद् मुकेश साह
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय का नया शिक्षण सत्र शुरू होने वाला है। इससे पूर्व शिक्षकों में पाजीटिव एनर्जी के संचार के लिए स्कूल में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के दूसरे दिन शिक्षकों में एनर्जी दोगुनी करने के लिए राजधानी के प्रसिद्ध शिक्षाविद् मुकेश शाह स्कूल पहुंचे। उन्होंने अपनी सकारात्मक बातों से जहां शिक्षकों का मार्गदर्शन किया वहीं उन्होंने कहा कि आपका स्टाफ रूम, मीटिंग रूम स्कूल का सबसे बड़ा एनर्जी हाउस है। अगर आप यहां नियमित रुप से समय देकर अन्य टीचर्स के साथ बैठते है तो आप एनर्जी लेकर क्लासरूम में जाएंगे। और जितनी पाजीटिव एनर्जी के साथ आप बच्चों के पास जाएंगे आप अपना प्रभाव बच्चों पर छोड़ पाएंगे। क्योंकि यही वो प्रोफेशन है जहां आप रिटायर नहीं होते। आपको आपके पढ़ाए बच्चे जीवन पर्यंत याद रखेंगे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि मैं इस प्रोफेशन में फोर्सफुली आया। फिर यह मेरा जुनून बन गया। शुरूआत के साढ़े तीन साल मैंने 300 रुपये महीने की नौकरी की। वह मेरे जीवन का सबसे अच्छा समय था। आप इस क्षेत्र में अपनी च्वाइस से आए है तो यह आपके लिए और भी ज्यादा अच्छा है। उन्होंने कहा कि आप अपने काम से प्रेम करिए। यह मन में बिल्कुल भी न लाए कि मैं तो 9 से 12 या 12 से 5 का टीचर हूं। टीचर तो टीचर होता है, 24 घंटे। आप लोगों ने जिस स्कूल में पढ़ाई की आप वहां जाते होंगे तो यह बोलते होंगे कि इस क्लास रूम में मैंने पढ़ाई की। इस बेंच में मैं बैठा करती थी। जब एक साल पढ़ाई करने पर आपको उस क्लास रूम और स्कूल से प्रेम है। आप यहां न जाने कितने बैच को पढ़ा चुकी है। यहां रोज आती है। हर वर्ष बच्चे बदलते जाते है। तो फिर इस क्लास से भी उतना ही प्रेम होना चाहिए।
मुकेश शाह ने कहा कि बीते शिक्षण सत्र में इस स्कूल के तीन बच्चों ने बोर्ड की मेरिट सूची में स्थान बनाया। जिन टीचर ने उन बच्चों को पढ़ाया सिर्फ उन्हें ही नहीं पूरे स्टाफ को इस बात पर गर्व करना चाहिए कि आप उस स्कूल या उस परिवार के अहम् सदस्य है जिसके बच्चों ने मेरिट में स्थान बनाया। आप यह मन में बिल्कुल मत सोचिए कि यह महाराष्ट्र मंडल का स्कूल है, बल्कि यह सोचिए कि यह मेरा स्कूल है। घर पर 5 या 6 सदस्य होते है और घर पर उठने, खाने, पीने, बैठने, टीवी देखने या कहीं बाहर घुमने के लिए एक सिस्टम बना होता है। वैसे ही स्कूल में नियम और सिस्टम बनाए जाते है। इसलिए स्कूल के नियम कायदे कानून को घर पर बनाए नियम की तरह ही समझे। उन्होंने कहा कि इसके साथ यह भी बेहद जरूरी है कि हमें जहां से अर्थ की प्राप्ति हो रही हो वहां का सम्मान हम अवश्य करें। कार्यशाला में स्कूल प्रभारी परितोष डोनगांवकर, प्राचार्य मनीष गोवर्धन, उपप्राचार्य राहुल वोड़ीतेलवार सहित समस्त शिक्षकगण उपस्थित थे।