शिवाजी महाराज के 352वें राज्याभिषेक दिवस पर 365 दीपों से महाआरती
- महाराष्ट्र मंडल ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया शिवाजी का दुग्धाभिषेक

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की युवा समिति ने तात्यापार चौक स्थित शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा के समक्ष शिवाजी महाराज का 352वां राज्याभिषेक दिवस उत्साह के साथ मनाया। सोमवार शाम 6.30 बजे आचार्य चेतन दंडवते और तात्यापारा हनुमान मंदिर के पुजारी संदीप देशपांडे ने मंत्रोच्चार के साथ शिवाजी महाराज का दुग्धाभिषेक कराया। जिसके उपरांत शिवाजी की प्रतिमा में माल्यार्पण कर 365 दीपों से महाआरती की गई। इस दौरान शिवाजी के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष प्रफुल्ल विश्वकर्मा, विशेष अतिथि के रुप में तात्यापारा वार्ड पार्षद श्वेता विश्वकर्मा, कुनबी समाज के प्रदेश संरक्षण एसएस ब्राह्मणकर उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रफुल्ल विश्वकर्मा ने कहा कि हम आज तक शिवाजी महाराज की जयंती मनाते आ रहे थे। महाराष्ट्र मंडल ने हमें बता दिया है, राज्याभिषेक दिवस जैसी भी कोई चीज होती है। इस आयोजन के माध्यम से हमें शिवाजी महाराज के बारे में जानने का मौका मिलता है। शिवाजी महाराज एक ऐसे साहसी और संकल्पित योद्धा थे, जिन्होंने 17वीं शताब्दी में ‘हिंद स्वराज्य’ के संस्थापक के रूप में कई ऐतिहासिक कार्य किए। 6 जून, 1674 को अपूर्व भव्यता के साथ वह छत्रपति, ‘सर्वोच्च संप्रभु’ के रूप में सिंहासन पर बैठे। छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिससे इस संप्रभु और शक्तिशाली हिंदू साम्राज्य की नींव पड़ी।

कार्यक्रम की विशेष अतिथि तात्यापारा वार्ड की पार्षद श्वेता विश्वकर्मा कहा कि मराठी समाज, तात्यापारा चौक और यहां स्थापित वीर शिवाजी प्रतिमा से उनका बरसो पुराना नाता है। आज मेरे लिए यह गौरव की बात है कि मैं इस कार्यक्रम की सहभागी बनीं।
महाराष्ट्र मंडळ के अध्यक्ष अजय काळे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र मंडळ की युवा समिति शिवाजी महाराज की महाआरती हर माह के 19 तारीख को विगत कई वर्षों से कर रही है। इस महाआरती के दिन हम शिवाजी महाराज के जीवन प्रसंगों पर चर्चा भी करते है, ताकि आज की युवा पीढ़ी उनके विचारों और हिंदूत्व की भावना को जान सकें।

कुनबी समाज के प्रदेश संरक्षण एसएस ब्राह्मणकर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 17वीं शताब्दी में ‘हिंद स्वराज्य’ के संस्थापक के रूप में शिवाजी महाराज ने कई ऐतिहासिक कार्य किए। उनकी युद्ध नीति आज हमारे देश के जवानों को लिए वरदान है।

महाराष्ट्र मंडल के सचिव चेतन दंडवते ने शिवाजी महाराज के युद्ध कौशल और उस समय की परिस्थिति को वर्तमान परिस्थिति से जोड़ते हुए कहा कि आज जो बंगाल में चल रहा, जिसे वहां के लोग महसूस कर रहे है। ठीक वैसी ही स्थिति शिवाजी महाराज के समय में रही होगी।

महाराष्ट्र मंडल की युवा समिति के समन्वयक विनोद राखुंडे ने बताया कि इससे पूर्व मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले, सचिव चेतन दंडवते, पंडित संदीप देशपांडे सहित अन्य समाजजनों ने शिवाजी महाराज का दुग्धाभिषेक किया। और महिलाओं ने 365 दीयों से शिवाजी महाराज की महाआरती की। बाल शिवाजी के भेष में पार्थ शेष और मोरया जोशी ने मंच पर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम का जय घोष कर लोगों का ध्यान खींचा।
