रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति के ऑनलाइन शिविर की सफलता में जितने बधाई के पात्र शिविरार्थी बच्चे हैं, उससे कहीं ज्यादा उनके अभिभावक प्रशंसा के पात्र हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को एकदम सही उम्र में संस्कार सीखने के लिए प्रेरित किया और उनका प्रतिदिन ऑनलाइन क्लास के समय साथ भी दिया। साथ ही शिविर में बच्चों को विभिन्न विधाओं में पारंगत करने वाली प्रशिक्षिका भी अभिनंदनीय हैं। काले ने कहा कि बच्चों ने शिविर में जो संस्कार सीखें हैं, उसे जीवन में आत्मसात करना है और इसे अपनी दिनचर्या भी बनाना है।
मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में आयोजित बाल संस्कार शिविर समापन समारोह में शिविरार्थी बच्चों ने योग के बहुत से आसन करके दिखाए। साथ ही संस्कृत के कई मंत्रोच्चार, भजन- गायन सहित अपने अनेक हुनर को अभिभावकों सहित दर्शकों के समक्ष प्रदर्शित किया। इस मौके पर अजय काले ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल का यह स्तुत्य कार्य भविष्य में भी जारी रहना चाहिए। यदि संभव हो तो महीने में दो दिन यानी हर पछवाड़े एक ऑफलाइन बाल संस्कार शिविर का आयोजन महाराष्ट्र मंडल में ही हो। बाद में शिविर के प्रतिसाद के अनुरूप इस शिविर को साप्ताहिक भी किया जा सकता है। काले ने आश्वस्त किया कि अभिभावकों की ओर से भविष्य में सकारात्मक प्रतिसाद मिला, तो महाराष्ट्र मंडल तीन दिन या सात दिनों का रहवासी बाल संस्कार शिविर भी लगा सकता है।
इस अवसर पर अभिभावकों ने भी ऑनलाइन शिविर को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। एक अभिभावक ने कहा कि वो तो इस बात ये ही खुश रहीं कि छुट्टियों में भी बच्चे मोबाइल से दूर ऑनलाइन क्लास से जुड़ने के लिए लालायित रहते थे। साथ ही काफी कुछ सीख भी रहे थे। एक अभिभावक के अनुसार महाराष्ट्र मंडल का यह प्रयास प्रशंसनीय है और आगे भी इस तरह के आयोजन होने चाहिए।
मंच का संचालन करते हुए सचिव चेतन दंडवते ने विशेष अतिथि शशि वरवंडकर और मंडल अध्यक्ष अजय काले के पांच ग्रुप में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने वालीं प्रशिक्षकों मंजुषा मरकले, चारुशिला देव, डॉ. दिपाली अलोणी, आकांक्षा गद्रे, डॉ. मंजुषा वैशंपायन, आस्था काले, साक्षी टोले, सृष्टि दंडवते, डॉ. अलकनंदा नारद, संध्या खंगन, वर्षा चोपकर, रसिका वोरा, सोनल शाह को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
इधर दिव्या पात्रीकर, अपर्णा कालेले और शिविर की संयोजिका आस्था काले ने बच्चों को गिफ्ट के साथ प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया। इससे पहले बच्चों ने योग के कई आसन करके दिखाए। तत्पश्चात उन्होंने एक के बाद एक मंत्रोच्चार से उपस्थित अभिभावकों और दर्शकों को प्रभावित किया। रोचक खेल के माध्यम से भी बच्चों ने अपने आध्यात्मिक ज्ञान का प्रमाण भी दिया। रसिका वोरा के नेतृत्व में बच्चों ने भजनों की प्रस्तुतियों से सभी को झूमने पर मजबूर किया। शिविरार्थियों को समापन समारोह की अंतिम कड़ी के रूप में पंगत में (नीचे) बिठाकर भोजन कराया गया। भोजन शुरू करने से पहले बच्चों ने कंठस्थ किए गए मंत्रोच्चार से एक बार फिर संस्कार शिविर की सार्थकता सिद्ध हो गई।