‘अपने मोबाइल पर सेव नंबर को पहले करें फोन, फिर ले सोशल मीडिया का सहारा’
रक्तदाता दिवसः रक्तदाता दिवस पर महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष ने की लोगों से अपील
रायपुर। आज मेडिकल इमरजेंसी होने पर हर चौथे मरीज को ब्लड की आवश्यकता पड़ ही जाती है। ऐसे में हमारे अपने लोग तत्काल सोशल मीडिया में मैसेज फावर्ड करने लग जाते है। ताकि कोई आए और उनके काम आ सके। 67 बार रक्तदान कर चुके महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि जब भी किसी को रक्त की आवश्यकता हो तो उन्हें पहले अपने मोबाइल पर सेव नंबरों पर काल करना चाहिए। आजकल सभी के मोबाइल में हजार से अधिक लोगों के नंबर सेव होते है, ऐसे में कोई न कोई आपकी मदद के लिए आगे जरूर आएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग सिर्फ शादी पार्टी में न्यौता देने के लिए नहीं है। यह आपके अपने लोग है, जो जरूरत पड़ने पर आपके काम आएंगे।
काले ने कहा कि 14 जून को प्रतिवर्ष विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन स्वैच्छिक और अवैतनिक रक्तदाताओं को समर्पित होता है जो अपने रक्तदान के माध्यम से अनगिनत जीवन बचाते हैं। यह न केवल आभार व्यक्त करने का अवसर है, बल्कि सुरक्षित और नियमित रक्तदान की निरंतर आवश्यकता को उजागर करने का भी समय है। आज की युवा पीढ़ी को रक्तदान के लिए प्रेरित करना जरूरी है। मेडिकल इमरजेंसी होने पर हम तत्काल समाजसेवी संगठनों के वाट्सएप ग्रुप से आस लगा बैठते है, जबकि आप सभी के पास अपने-अपने मोबाइल नंबर पर न जाने कितने रक्तदाताओं के नाम होंगे। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया है कि मेडिकल इमरजेंसी पर रक्त की आवश्यकता होने पर अपने मोबाइल में सेव नंबरों पर पहले काले करें, यह काम एक-दो घंटें में आसानी से हो सकता है। फिर भी आपूर्ति नहीं होती है तो समाजसेवी संगठनों के वाट्सएप ग्रुप में मैसेज शेयर करें।
भीमराव मेडिकल कालेज में पैथोलाजी विभाग के अध्यक्ष और अब तक 43 वर्षों में 126 से अधिक बार रक्तदान कर चुके डा. अरविंद नेरल ने कहा कि सेवा का संकल्प लिया जाए तो उसकी कोई सीमा नहीं होती है। उन्होंने बताया कि नया साल पर, अपने जन्मदिन 2 जून पर और राष्ट्रीय रक्तदान दिवस 1 अक्टूबर को वें नियमित रुप से रक्तदान करते आ रहा है। डा नेरल इस माह जून 2025 65 वर्ष की हो गए। मेडिकली रुप से वे अब रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन लोगों को जागरूक करने के लिए उनका अभियान जारी रहेगा। अब वे रक्तदान को आयोजित कार्यशाला, स्कूल और कालेजों में सेमिनार पर अपनी सहभागिता बढ़ाएंगे ताकि इसके प्रति युवा पीढ़ी का रूझान बढ़ सके।
महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद और 100 बार रक्तदान और 5 बार एसडीपी (सिंगल डोनर प्लेटलेट्स) कर चुके अरविंद जोशी ने कहा कि आज से समय में युवाओं को एसडीपी करना चाहिए। एसडीपी का मतलब सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (Single Donor Platelets) है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक ही रक्तदाता से प्लेटलेट्स को एक विशेष मशीन (एफेरेसिस मशीन) द्वारा अलग करके इकट्ठा किया जाता है, और फिर वह प्लेटलेट्स, बाकी रक्त के साथ, दाता को वापस कर दी जाती है। यह उन रोगियों के लिए उपयोगी है जिन्हें प्लेटलेट्स की आवश्यकता होती है, जैसे कि डेंगू, मलेरिया, या ब्लड कैंसर जैसी बीमारियों में। एसडीपी का उपयोग करने से, संक्रामक रोगों का खतरा कम होता है, और यह सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज को एक ही दाता से पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट्स मिलें, जिससे अन्य दाताओं से प्लेटलेट्स को मिलाने की आवश्यकता नहीं होती है।