विट्ठल माऊली की भक्ति में 'सहयोग' ने निकाली पंढरपुर की वारी
2025-07-02 10:45 PM
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0- चौबे कॉलीनी स्थित भगिनी मंडल में नृत्य- संगीत के साथ वरिष्ठ जनों में दिखा भक्तिमय उत्साह
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल से जुड़े जेष्ठ नागरिकों का मंच ‘सहयोग’ की मासिक बैठक के दौरान बुधवार को चातुर्मास से पूर्व भगवान विट्ठल की भक्ति में पंढरपुर की वारी का प्रतिरूप दिंडी (शोभायात्रा) के रूप में निकाली गई।
'सहयोग' की अध्यक्ष अपर्णा कालेले ने बताया कि शोभायात्रा में आठ महिलाओं ने शोभायात्रा के सामने नृत्य- संगीत करते हुए विट्ठल मा़ऊली के प्रति अपनी सद्भावना व्यक्त की। पीछे में शोभायात्रा के साथ एक भक्त ने श्री विट्ठल रखुमाई की मूर्ति को अपने सिर पर रखकर और बाकी सदस्यों ने मराठी वेशभूषा में झंडा व सिर पर तुलसी वृंदावन रखकर शोभायात्रा निकाली। तत्पश्चात विट्ठल व रखुमाई के रूप में सजे हुए रविकांत भागवत और अरुणा भागवत ने शोभायात्रा के सभी सदस्यों का अभिवादन स्वीकार किया। विट्ठल रखुमाई की मूर्ति को सभागृह में रखकर उसके समक्ष समोपचार पूजा की गई।
तत्पश्चात विट्ठल भगवान के भजन व अभंग गाए गए। महाराष्ट्र के संतों के जीवन चरित्रों के बारे में जानकारी दी गई। वारी में गाए जाने वाले भजन- कीर्तन पर भी ज्ञानवर्धक चर्चा की गई। बैठक की शुरुआत गणेश स्तोत्र पाठ से की गई। जुलाई माह में जिन सदस्यों की जन्मतिथि है, उन्हें शुभकामनाएं दी गईं। उनकी आरती उतारकर मुंह मीठा किया गया। छह जुलाई को देवशयनी एकादशी है। इसी वजह से आज के सभी कार्यक्रमों में भगवान विष्णु और विट्ठल भगवान से संबंधित कीर्तन, प्रवचन व भजन गाए गए।
अध्यक्ष अपर्णा कालेले ने बताया कि यह माना जाता है कि वारी संत ज्ञानेश्वर के पिता जी ने शुरू की थी। उनके समाधि लेने के बाद उनकी चरण पादुकाओं को लेकर सभी भक्तगण विट्ठल भगवान का दर्शन करने के लिए 250 किलोमीटर की पदयात्रा कर पंढरपुर जाते हैं। विट्ठल भगवान को सभी भक्तजन माऊली कहकर पुकारते हैं, जिसका मराठी में अर्थ मां होता है।
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कोषाध्यक्ष दीपक पात्रीकर ने अपने उद्बोधन में जानकारी दी कि महाराष्ट्र में देवशयनी एकादशी का बहुत महत्व होता है। इस दिन यह वारकरी (पदयात्री) यात्रा पूर्ण कर अपने लक्ष्य तक पंढरपुर पहुंचते हैं और विट्ठल भगवान के दर्शन कर अपनी यात्रा को सार्थक करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु शयन करने चले जाते हैं। इससे सभी शुभ कार्य चार माह तक नहीं किए जाते हैं।
डिंडी के सामने नृत्य- संगीत में शामिल अर्चना मुकादम, प्रियंका बोरवणकर, दीपांजलि भालेराव, वर्षा डांगे, रंजना काठोटे, प्रभा डबली, स्नेहल मोडक, दिव्या पात्रीकर थीं। संध्या खंगन, कुंदा अत्रे, नेहा किल्लेदार, शुभदा गिजरे, माधवी पौंक्षे ने विट्ठल भगवान के भजन गाए। कार्यक्रम का संचालन दिव्या पात्रीकर ने किया।