दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्ट्र मंडळ के शुभचिंतक समाजसेवी ‘रामदास’ का यूं चले जाना

अजय मधुकर काळे

विकास भैया यानी रामदास जोगळेकर अचानक चले गए। बचपन से महाराष्ट्र मंडळ के कार्यालय में झाड़ू लगाना, कैरम साफ करना, मंडळ के कार्यो में मजदूर की तरह काम करना, बड़े होते-होते नाटकों में काम करना, नेपथ्य में काम तो ध्वनि संयोजन, दिलीप लाम्बे जी के साथ मस्ती करते हुए सभी का मनोरंजन करते हुए कार्य का संपादन करना ये सब आज फ़िल्म चल रही है सामने।  मंडळ के संबंध में घंटों बातें करना, प्लानिंग करना क्रियान्वयन करना, सबसे बड़ी बात यह कि CA वो मंडळ के बाहर थे, उनके लिए अज्जू मंडळ के बाहर पर भवन में आने के बाद मुझे उनका सम्बोधन काळे साहेब आइका कहना बड़ा अजीब लगता उन्हें कहा भी था पर उन्होंने कहा बाबा के सपनों को मंडळ भवन को पूरा करने में जो तुम लोगों की टीम लगी है, मैं नतमस्तक हुं।

मैं सामान्य आजीवन सभासद ही रहना चाहता हूं। तब मैंने कहा था कि भैया आप का आशीर्वाद स्नेह तब मानूंगा जब आप इतने बड़े भवन के नवनिर्माण में हमें आखिरी तक सहयोग करेंगे और उसके लिए आपको मेरी एक बात माननी पड़ेगी और फिर मैंने, चेतन जी और दीपक किरवईवाले जी ने  बात करके उनको भवन नवनिर्माण समिति का संयोजक बनने के लिए तैयार किया। क्योंकि उनके सहयोग आशीर्वाद के बिना इतना बड़ा संकल्प पूर्ण करना असंभव था। और ये सिद्ध भी किया उन्होंने की भवन का पूरा हिसाब किताब कितना लोहा लगा से लेकर फिनिशिंग तक की एक-एक राशि का हिसाब प्रस्तुत कर दिया। ये उनकी मेहनत महाराष्ट्र मंडळ व हम सब के प्रति विश्वास व प्रेम प्रदर्शित करती है। मंडळ के कार्यो में उन्हें मेरी कुछ बात जचती नहीं थी तो कहते थे हाथ जोड़ता हूं तेरे इतना धैर्य नहीं बचा मेरे में, फिर मैं ही कहता था कि असहमतियों के बीच भी आप सहमत होते हुए हमें, मंडळ के लिए दिन रात मेहनत कर के सपोर्ट कर रहे है ये वंदनीय है।

पुरानी बातों को याद यदि करूं तो महराष्ट्र मंडळ के 1975 से 1990 तक के आडिट कार्यं को सम्पन्न करके अपडेट करना। मंडळ को पंजीयक फर्म सोसायटी से रेगुलर करवाना और आयकर 80 जी में टेक्स रिबेट करवाना जैसे महत्वपूर्ण कार्य तो हुए ही है । मुझे सौभाग्य मिला कि जोगळेकर परिवार से मंडळ के विकास समृद्धि निरन्तर होने के लिए सहयोग आशीर्वाद मिलता रहा। रामदास विकास भैया का समर्पण महाराष्ट्र मंडळ हमेशा याद रखेगा।