दिव्य महाराष्ट्र मंडल

कारावास में अवसर ढूंढकर तिलक ने गीता रहस्य नामक ग्रंथ की रचना कीः प्रसन्न

संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में मनाई गई तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में बुधवार 23 जुलाई को चंद्रशेखर आजाद और बाल  गंगाधर तिलक की जयंती मनाई गई।  कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रुप में दिव्यांग बालिका विकास गृह के प्रभारी प्रसन्न निमोणकर पहुंचे थे। उन्होंने बच्चों को तिलक और चंद्रशेखर के के विचारों और सिद्धांतों के बारे में विस्तार से बताया।

निमोणकर ने तिलक के जीवन के बारे में बच्चों को बताते हुए कहा कि वे जितने ईमानदार और स्‍पष्‍ट वक्‍ता थे, उतने ही आक्रामक भी थे। उस काल में गरम दल का अर्थ बंदूक, गोला- बारूद हुआ करता था, लेकिन उनके गरम दल का अर्थ लेखन में था। तिलक ने म्यांमार में कारावास के दौरान अवसर ढूंढकर गीता रहस्‍य नामक ग्रंथ की रचना की।  उन्होंने तिलक और आजाद की शिक्षा, आजादी के आंदोलन में योगदान को भी रेखांकित किया। वहीं दोनों के जीवन से जुड़े कुछ रोचक किस्से भी सुनाए।

इससे पूर्व विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक अखिल खरे सर ने सूट माला के द्वारा परंपरागत तरीके से निमोणकर जी का स्वागत किया। क्रांतिकारी राम प्रसाद  बिस्मिल की पंक्तियों द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षिका आराधना लाल ने किया। शिक्षिका सरिता पांडे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा कार्यक्रम में स्क्रीन संचालन की  भागीदारी शिक्षक रोशन सिंह राजपूत की रही। विद्यालय के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने प्रसन्न निमोणकर का आभार व्यक्त किया।