एकाग्रता बढ़ाने के साथ भावनाओं को सकारात्म करती है हस्त योग मुद्राः शिव नारायण मूंदड़ा
2025-07-26 06:36 PM
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- संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में हुई एक दिवसीय हस्त मुद्रा पर कार्यशाला
रायपुर। हस्त मुद्रा योग में उपयोग की जाने वाली शारीरिक मुद्राएं हैं। ये मुद्राएं शरीर के विभिन्न तत्वों को संतुलित करने और ऊर्जा प्रवाह को निर्देशित करने में मदद करती हैं। ये मुद्राएं मन को शांत करने, तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं। उक्ताशय के विचार स्वयंप्रभा आधुनिक ध्यान विधि के अविष्कारक शिव नारायण मूंदड़ा ‘वास्तु मित्र’ ने संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में आयोजित एक दिवसीय हस्त मुद्रा पर आयोजित कार्यशाला में कहीं।

मूदड़ा ने बताया कि सुरभि हस्त मुद्रा में उंगलियों को इस तरह से रखा जाता है कि यह गाय के थनों के समान दिखाई दे। इसका अभ्यास शरीर में ऊर्जा को निर्देशित करने और विभिन्न लाभ प्राप्त करने के लिए किया जाता है, जैसे कि याददाश्त और एकाग्रता में सुधार, तनाव कम करना, और इच्छाओं को पूरा करना। इसी तरह पंकज हस्त मुद्रा, जिसे कमल मुद्रा भी कहा जाता है, एक योग मुद्रा है जो पवित्रता और सकारात्मकता का प्रतीक है। यह मुद्रा कमल के फूल के समान दिखती है, जहाँ हाथों की उंगलियां कमल की पंखुड़ियों की तरह फैली होती हैं। यह मुद्रा मन, विचारों और भावनाओं को सकारात्मक बनाने में मदद करती है।
स्कूल की शिक्षिका आराधना लाल ने बताया कि मुदड़ा जी ने बच्चों को हस्त मुद्राएं सीखाई और उनके लाभ भी बताए। उन्होंने सुरभि मुद्रा को बच्चों के साथ शिक्षकों के लिए अति आवश्यक बताया। इस दौरान बच्चों ने भी इन मुद्राओं का अभ्यास किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय प्रभारी परितोष डोनगांवकर विशेष रुप से मौजूद रहे। परितोष ने अपने संबोधन में मूदड़ा जी की सराहना की औप हस्त मुद्राओं को अपने जीवन का आवश्यक कार्य बनाने पर बल दिया।
विद्यालय के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने भी शिवनारायण के कार्यक्रम की सराहना की तथा उन्हें विश्वास दिलाया कि 20-25 नहीं अधिक से अधिक विद्यार्थी इसका पालन करेंगे। कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका सरिता पांडे ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन आराधना लाल ने किया।