(फोटो परिचयः महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में स्वतंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर के पोते रंजीत विक्रम सावरकर सभा को संबोधित करते हुए।साथ में मंचस्थ हैं महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले व सुनील धनवट।)
- महाराष्ट्र मंडल ने स्वातंत्र्य वीर सावरकर के पोते का किया अभिनंदन
रायपुर। महाराष्ट्र में चल रहे भाषा विवाद के चलते स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर के पोते रणजीत विक्रम सावरकर ने कहा कि जो लोग अपने ही पिता व चाचा के सिद्धांतों को भूला चुके हैं, वे मराठी भाषा को लेकर विवाद खड़ा कर रहे हैं। अगर इतना ही मराठी से प्रेम था तो जब वे सत्ता पर थे, उस समय मराठी को ज्ञान की भाषा क्यों नहीं बनाया। इस अवसर पर रणजीत सावरकर का अभिनंदन महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने सूत माला, शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंटकर किया।
रणजीत सावरकर ने कहा कि देश के विरोधियों को समझ में आ गया है कि अगर देश को तोड़ना है तो महाराष्ट्र को तोड़ना होगा। क्योंकि महाराष्ट्र में देश की आर्थिक राजधानी मुंबई है। इसी के चलते महाराष्ट्र में भाषा विवाद चल रहा है। मैं मुंबई से आया हूं, वहां का स्थानीय मराठी यह बिल्कुल नहीं मानता कि यहां रहने वालों को मराठी आनी ही चाहिए।
(महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में रविवार की शाम को स्वतंत्र वीर विनायक दामोदर सावरकर के पोते रंजीत विक्रम सावरकर को सुनने के लिए बड़ी संख्या में महाराष्ट्र मंडल के सभासदों के अलावा अन्य प्रबुद्ध नागरिक भी पहुंचे।)
सावरकर ने आगे कहा कि सन् 1989 में जब भारत के गृहमंत्री ने अपनी बेटी का नकली अपहरण करवाकर न केवल बड़ी संख्या में आतंकवादियों को जेल से छुड़वा दिया था, बल्कि अपने कार्यकाल के शुरुआती हफ्तों में ही कश्मीर से पांच लाख कश्मीरी पंडितों को बुरी तरह से प्रताड़ित कर पलायन करने पर मजबूर कर दिया था। आप सोचिए कि कल के दिन ऐसी ही विचारधारा वालों की सरकार बनी, तो भारत देश में हिंदुओं की दशा क्या होगी।
हिंदू जन जागृति समिति छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र संगठन के प्रमुख सुनील घनवट ने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए हम सभी को वीर सावरकर के सिद्धांतों को पढ़ना होगा। सावरकर के विचारों को आत्मसात कर उसे जन-जन तक पहुंचाना होगा। तभी देश हिंदू राष्ट्र बन सकता है।
(मराठी समाज के वरिष्ठ उद्यमी व समाजसेवी शशि वरवंडकर ने महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में स्वतंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर के पोते रंजीत विक्रम सावरकर को स्व लिखित पुस्तक 'दीप द्वार' की प्रति भेंट की।)
इससे पूर्व महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल ने वीर सावरकर और छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन चरित्र को पाठ्य पुस्तक की किताबों में शामिल करने की मांग मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की है। वहीं प्रदेश के युवाओं को वीर सावरकर के बारे में बताने के लिए युवाओं को अंडमान निकोबार जेल की यात्रा कराने का प्रस्ताव दिया गया है। कार्यक्रम का संचालन संत ज्ञानेश्वर स्कूल प्रभारी परितोष डोनगांवकर और आभार प्रदर्शन सचिव चेतन दंडवते ने किया।