दिव्य महाराष्ट्र मंडल

विकास भैया का जाना महाराष्ट्र मंडल की बड़ी क्षति

(लेखकः अजय मधुकर काले, अध्‍यक्ष, महाराष्‍ट्र मंडल रायपुर)


रामदास जोगलेकर जी के बारे में जितना भी लिखा जाए, वो कम ही है। एक व्यक्ति ज़िंदगी में आता है, अपना कैरियर बनाता है, लेकिन साथ- साथ अपने सामाजिक दायित्वों को निभाते रहता है, तो वो फिर सिर्फ परिवार का नहीं रह जाता, वो कई लोगों के साथ रहता है। उसके लिए जरूरी नहीं कि वो रोज दिखे, रोज बात करे। वह तो अपना तभी बन जाता है जब वो अपने हर कार्य में, मिशन में अपने समाज को रखता है। फिर वो समाज के साथ कार्यं करते समय सिर्फ ये देखता है कि मेरे कार्य करने से, सुझाव देने से, बात करने से, समाज को क्या फायदा हो सकता है। कुछ ऐसे ही व्यक्तित्व थे विकास भैया। जो अनेक संस्थाओं के साथ तो जुड़े थे ही, लेकिन पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण बचपन से महाराष्ट्र मंडल से जुड़़ गए और जुड़े ऐसे कि मंडल के कार्यों को फर्स्ट प्रायोरिटी देते थे। बाद में खुद के और परिवार के अन्य कार्यों को। 
 
महाराष्‍ट्र मंडल के दिव्यांग बालिका विकास गृह के समता कॉलोनी में भवन निर्माण कार्य में शशि भाऊ (शशि वरवंडकर जी) के साथ ट्यूनिंग बनाकर विकास भैया लगे रहे। वहीं महाराष्‍ट्र मंडल के भवन निर्माण के लिए साल 2016 से 2025 तक नए भवन निर्माण समिति के संयोजक (प्रमुख) की भूमिका में उन्‍होंने विभिन्न महत्‍वपूर्ण कार्यो को अपनी देखरेख में पूरा किया और करवाया। विकास भैया हमेशा कहा करते थे कि मुझे तो सपने में भी अत्‍याधुनिक और सर्वसुविधाजनक वाला अपना नया भवन ही दिखाई देता है। इसके पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि पहले महाराष्‍ट्र मंडल का भवन बाबा (यशवंत गोविंद जोगलेकर) के अध्‍यक्षीय कार्यकाल में बना था। अब नया भवन बेटे के संयोजकत्व में बन रहा था। विकास भैया मुझे कहते थे कि बाबा की तरह मंडल कार्यों का बीड़ा अजु तुम और तुम्हारी कार्यकारिणी ही उठा सकती है। चाहे तुमको कोई कुछ भी कहे, मैं हमेशा तुम्‍हारे साथ हूं। इतना विश्वास वो ही कर सकता था, जिनके खून में महाराष्‍ट्र मंडल की सेवा समा गई हो।
 
विकास भैया कोरोना काल में लोगों की सेवा में लगें रहे। छोटे भाई मुन्ना की बीमारी में तन- मन- धन से जान लगा कर सेवा करते रहे। मंडल हित में अनेक बार खुद के विचारों की तिलांजलि देना, तो खुले दिल से स्वीकार करना कि मुझे जो कार्य दोगे, वो कर दूंगा... पर लोगों से कार्य करवाने में अब हिम्मत नहीं, समय नहीं। विकास भैया हमेशा मुझसे कहते कि मैं मंडल के हर निर्णय में साथ हूं। चाहे वो मेरे विचारों के अनुरूप हो या प्रतिकुल। ऐसा बिंदास बोलने वाला व्यक्ति यदि अब साथ नहीं है, तो ये महाराष्‍ट्र मंडल की कितनी बड़ी क्षति है। वास्‍तव में ये हमारी क्षति है और इसे सिर्फ हम ही महसूस कर सकते हैं। परफेक्‍ट हिसाब- किताब वाले महाराष्‍ट्र मंडल की बेलेंस शीट में इस साल अभी से बहुत बड़ा लॉस दिखाई देने लग गया है, क्योंकि मंडल ने अपना एक विश्‍वस्‍त विकास भैया को खो दिया हे। लोग कहते हैं कि किसी के जाने से दुनिया नहीं रुकती। मैं कहता हूं कि ये सिर्फ परिजन, मित्र मंडली और महाराष्‍ट्र मंडळ वाले ही इसे महसूस कर सकते हैं। विकास भैया ने लोगों के दिलों में ये जो जगह बनाई है, वो हमेशा रिक्त ही रहेगी। हम सभी उनके अधूरे कार्यों को उनकी इच्छानुरूप पुरा करने के प्रयास हमेशा करते रहेंगे। कुछ लोग जाते हैं, जिन्हें हम नहीं जानते। उन्हें हम श्रद्धांजलि देते हैं। कुछ जो जाते हैं, जिन्हें हम आदर करते हैं। उन्हे हम आदरांजलि अर्पित करते हैं। कुछ जो जाते हैं, वे अपनी छाप छोड़ जाते, अनुकरणीय कार्य कर जाते हैं, उन्हें हम अनुकरणांजलि देते हैं। आज विकास भैया नहीं हैं, लेकिन बाबा के सामाजिक कार्यों के संस्‍कार और परंपरा को आगे बढाते हुए बहुत बड़ा कार्यं कर गए।