दिव्य महाराष्ट्र मंडल

बच्चों और बड़ों ने दिया बाल गजानन को आकार... बोले गणपति बप्पा मोरिया

रायपुर। मिट्टी से मूर्ति बनाने की बात हो तो बच्चे क्या बड़े भी पीछे नहीं रहते। लेकिन बच्चों में इसे लेकर ज्यादा उत्साह देखा जा सकता है। रविवार 17 अगस्त को महाराष्ट्र मंडल पहुंचे 100 से अधिक बच्चों और बड़ों में ऐसा ही उत्साह नजर आया। मौका था महाराष्ट्र मंडल द्वारा आयोजित निःशुल्क ‘आओ बनाएं मिट्टी के गणेश’ के कार्यक्रम का। 
 
मंडल की कला एवं संस्कृति समिति द्वारा लगातार 12 वर्षों से चली आ रही परंपरा में इस वर्ष भी बच्चों के साथ बड़ों में खासा उत्साह नजर आया। बच्चों ने जहां बाल गणेश को आकार दिया वहीं बड़े बुजुर्गों ने भगवान की अभय मुद्रा और बाल कृष्ण जैसे रूपों को साकार किया। बच्चों का मार्गदर्शन आर्टिसन अजय पोतदार ने किया। उनका साथ सोनल फडणवीश और शेखर क्षीरसागर ने किया।
 
 
महाराष्ट्र मंडळ ने 17 अगस्त को बच्चों को मिट्टी के श्रीगणेश की प्रतिमा बनाने की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। लगातार 12 वर्षों से चल रहे इस काम में इस वर्ष भी 100 से अधिक बच्चों ने अपनी भागीदारी निभाई। बच्चों ने मिट्टी से श्री गणेश को आकर्षक स्वरूप प्रदान किया। खुद से मिट्टी के गणेश बनाकर बच्चों में अच्छी खासी खुशी देखी गई।
 
 
महाराष्ट्र मंडळ के कला एवं संस्कृति प्रभारी अजय पोतदार के मार्गदर्शन में बच्चों ने श्रीगणेश की प्रतिमा बनाई। अजय ने बताया कि साल दर साल इसमें भाग लेने वालों की संख्या बढ़ रही है। इस वर्ष 100 से अधिक बच्चों ने अपनी सहभागिता निभाई और प्रतिमा का निर्माण किया। 
 
 
अजय ने बताया कि मिट्टी मंडळ की ओर से उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने बताया कि मिट्टी से श्रीगणेश की प्रतिमा बनाने के लिए सर्वप्रथम कुल मिट्टी को पांच बराबर भागों में बांटा गया। पहले भाग से प्रतिमा के लिए बेस तैयार किया गया। दूसरे भाग से भगवान का पेट वाला हिस्सा तैयार किया गया। तीसरे भाग से भगवान का सिर और शूड तैयार किया गया। चौथे भाग के दो हिस्से कर दोनों पैर बनाए गए। पांचवें भाग के चार हिस्से कर श्रीगणेश के चारों हाथ तैयार किए गए। मिट्टी को पांच बराबर हिस्सों में इसलिए बांटा गया ताकि प्रतिमा के सारे अंग बराबर बने कोई मोटा पतला न हो।