दिव्य महाराष्ट्र मंडल

'चूक- भूल द्यावी- घ्यावी’ में नजर आएगा एक वयोवृद्ध दंपती का वैवाहिक समर्पण

- महाराष्ट्र मंडल गणेशोत्सव के दौरान कुमुदिनी वरवंडकर रंगमंच पर पांच सितंबर को होगा मराठी नाटक का मंचन

रायपुर। ‘चूक- भूल द्यावी- घ्यावी’ यानी भूल-चूक लेनी-देनी....। महाराष्ट्र मंडल के शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में शुक्रवार, पांच सितंबर को शाम सात बजे से मराठी नाटक ‘चूक- भूल द्यावी- घ्यावी’ का मंचन संत ज्ञानेश्वर सभागृह के कुमुदिनी वरवंडकर रंगमंच पर किया जाएगा। दिलीप प्रभावलकर लिखित नाटक 'चूक भूल द्यावी-घ्यावी'  एक हास्य नाटक है जो दर्शकों कों को हंसाता है और परिवार के सदस्यों को एक साथ लाता है। इस नाटक की कहानी रोज़मर्रा की घटनाओं पर आधारित है और लोगों को इससे जोड़ती है। 
 
नाटक के दिग्दर्शक प्रसन्न निमोणकर ने बताया कि दिलीप प्रभावलकर एक बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी हैं, जिन्हें मुख्यतः मराठी और हिंदी फिल्मों, टेलीविजन और रंगमंच के एक प्रसिद्ध अभिनेता के रूप में जाना जाता है, लेकिन वे एक लेखक और नाटककार भी हैं। उन्होंने कई हास्य और गंभीर भूमिकाएं निभाई हैं। उन्होंने 'लगे रहो मुन्ना भाई' में महात्मा गांधी का किरदार निभाने के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता है। उनके लिखे नाटक  ‘चूक- भूल द्यावी- घ्यावी’ का मंचन किया जा रहा है। 
 
निमोणकर के मुताबिक इस कहानी में एक वयोवृद्ध दंपती अपना सफल वैवाहिक जीवन व्यतीत करता है। इस दौरान बुढ़ापे में पति अपनी पत्नी से कहता है कि मैंने अपनी जीवन में कुछ बातें तुमसे छुपा कर रखी थी। जिसे मैं तुम्हें बताना चाहता हूं। पत्नी बोलती है कि अब तक नहीं बताया तो अब बताने की जरूरत क्या है। इस पर पति कहता है कि मेरा मन नहीं मान रहा। फिर वह अपनी पत्नी को अपने कुछ किस्से सुनाता है, जिसमें जाने-अनजाने में कहीं न कहीं उसे अपराध बोध था। वहीं पति के बताने के बाद कुछ अपने राज से पत्नी भी पर्दा उठाती है।  नाटक के संवाद दर्शकदीर्घा को हंसाते हुए नजर आएंगे। 
नाटक में महाराष्ट्र नाट्य मंडल के वरिष्ठ प्रा. अनिल श्रीराम कालेले का मार्गदर्शन मिला है। वहीं नाटक में प्रसन्न निमोणकर, भगीरथ कालेले, आचार्य चेतन दंडवते, पवन ओगले, गौरी क्षीरसागर, प्रिया बक्षी, कुंतल कालेले, कीर्ति हिशीकर और प्रगति ओगले अभिनय करते नजर आएंगे।