दिव्य महाराष्ट्र मंडल

शिवाजी की दूरदर्शिता और रणनीतिक सोच अनुकरणीयः अनिल कालेले

0-  महाराष्‍ट्र मंडल में छत्रपति शिवाजी महाराज की मासिक महाआरती में जुटे ज्‍यादातर युवा सभासद

रायपुर। महाराष्‍ट्र मंडल में शुक्रवार शाम को छत्रपति शिवाजी महाराज की मासिक महाआरती की गई। तत्पश्चात शिवाजी महाराज के जीवन के प्रसंगों पर चर्चा की गई। वरिष्‍ठ प्राध्‍यापक अनिल श्रीराम कालेले ने शिवाजी महाराज के रोचक प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि मनुष्य़ को अपने जीवन में घटने वाली हर एक घटना से शिवाजी महाराज की तरह कुछ न कुछ सीखना चाहिए। 
कालेले ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की दूरदर्शिता और रणनीतिक सोच हमारे लिए प्रेरणादायी और अनुकरणीय है। शिवाजी महाराज ने मुगलों के विरुद्ध छापामार युद्ध के दौरान एक वृद्ध महिला के घर भोजन मांगा। भोजन करते समय वे अपनी अंगुलियां जला बैठे। खाना परोस रहीं उस वृद्धा ने उन्हें सलाह दी कि बड़े किले पर सीधा हमला करने के बजाय किनारे से थोड़ा-थोड़ा करके छोटे किलों को जीतना चाहिए। शिवाजी ने इस सीख को अपनाया और अपने सैनिकों के साथ छोटे- छोटे लक्ष्‍य तय करके रणनीति बनाकर युद्ध किए और जीते भी। उसके बाद फिर बड़े युद्धों में बड़ी कामयाबी हासिल की, बड़े किले जीते। 
वरिष्‍ठ प्राध्‍यापक कालेले के अनुसार शिवाजी महाराज का यह गुण कि कभी भी किसी से भी कुछ भी सीखने को तैयार रहो, हम सभी के लिए प्रेरक है। जरूरी नहीं हमें हमारे गुरुजन या अभिभावक ही शिक्षित करें। हमारे जीवन में भी छत्रपति शिवाजी महाराज वाली दूरदर्शिता और रणनीतिक सोच होनी ही चाहिए। 
कालेले ने कहा कि आज भी हमारे बीच कई ऐसी घटनाएं घटती हैं, तो हमें अच्छे भविष्य के लिए संकेत देतीं हैं, जिसे आमतौर पर हम पहचान नहीं पाते। समय गुजरने पर हमें इस बात का एहसास होता है कि काश उस समय ऐसा किया होता तो आज ऐसा परिणाम नहीं होता। इस अवसर पर वरिष्‍ठ सभासद प्रशांत देशपांडे, युवा समिति के समन्‍वयक विनोद राखुंडे, प्रमुख डॉ. शुचिता देशमुख, सह प्रमुख रीना बाबर, शुभम् पुराणिक, गणेशा जाधव, अनुराग भवालकर, सचेतक रविंद्र ठेंगडी सहित अनेक पदाधिकारी व सभासद उपस्थित रहे।