दांतों की सुरक्षा के लिए सही ब्रश का चयन और उपयोग जरूरीः डॉ. जितेंद्र सराफ
रायपुर। उम्र के एक पड़ाव के बाद लोग अपने शरीर की नियमित जांच कराते है, लेकिन दांतों की जांच को वो अनदेखा कर देते है। दांतों की सही देखभाल नहीं करने का नतीजा यह होता है कि समय के साथ दांतों में दर्द, झंझनाहट, मसूड़ों में दर्द, पस आना ऐसी शिकायतें आती है, जिसके बाद लोग डाक्टरों की पास पहुंचते है। कई बार लोग मेडिकल से दवाई लेकर खुद ही खा लेते है। कई बार ऐसी लापरवाही भारी पड़ जाता है। दांतों की सुरक्षा के लिए सही ब्रश का चयन और उपयोग करने का तरीका सभी को जानना बेहद जरूरी है। उक्ताशय के विचार राजधानी के वरिष्ठ दंत चिकित्सक सीता मेमोरियल डेंटल क्लिनिक के दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सराफ ने कहीं। वे महाराष्ट्र मंडल और वरिष्ठ नागरिक मंच ‘सहयोग’ के संयुक्त तत्वावधान में मंडल में आयोजित ‘स्वास्थ्य चिंतन शिविर’ में कहीं।

डॉ. जितेंद्र सराफ ने वरिष्ठ नागरिक मंच सहयोग के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें हमेशा अल्ट्रा साफ्ट ब्रश का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं कुछ भी खाने के बाद नियमित रुप से पानी जरूर पीना चाहिए। ताकि खाने की कोई भी चीज का कोई भी कण हमारे दांतों में न फंसा रहे। छह महीने में एक बार माउथ वाश के कुल्ला जरूर करें। आमतौर पर लोगों को दांतों में सड़न, मसूड़ों से बदबू आना, मुंह सूखना की समस्या आती है। हड्डियां कमजोर होने के कारण हमारे दांतों में गेप आ जाता है। दांत में गेप आने या दांत के टूट जाने के बाद उच्चारण में हमें तकलीफ होती है। लोग हमारी बातें अच्छे से समझ नहीं पाते है। इसलिए दांतों में दर्द होने पर डाक्टरों की सलाह जरूर लें।

डॉ. जितेंद्र सराफ ने आगे बताया कि कुछ लोगों को यह मिथ्या होती है कि जिसका दांत ज्यादा सफेद है उनके दांत ज्यादा स्वस्थ्य है। लेकिन ऐसा नहीं है। जिस तरह कोई गोरा, कोई सांवला होता है, उसी तरह दांतों का रंग भी कुदरती देन है। सभी के दांत पूरी तरह सफेद हो ऐसा नहीं है। कुछ लोग ब्रश को रगड़कर या जोर लगाकर दांत साफ करते है, ऐसा भी नहीं चाहिए। दांतों की सफाई ऊपर से नीचे की ओर स्मूथली करना चाहिए। ब्रश करने के बाद मसूड़ों की मसाज उंगलियों से जरूर करें।