दिव्य महाराष्ट्र मंडल

*सुप्रसिद्ध कथाकार ज्ञानरंजन को महाराष्‍ट्र मंडल ने दी भावभीनी श्रद्धांज‍लि

 रायपुर। महाराष्‍ट्र मंडल की मराठी साहित्‍यक समिति ने गुरुवार शाम को वरिष्‍ठ साहित्‍यकार ज्ञानरंजन को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर अध्‍यक्ष अजय मधुकर काले ने ज्ञानरंजन की साहित्यिक यात्रा पर चर्चा की और उन्‍हें सम्मानित किए जाने वाले गजानन माधव मुक्तिबोध सम्‍मान समारोह का स्‍मरण किया।

काले ने कहा कि जाने- माने कथाकार ज्ञानरंजन को महाराष्‍ट्र मंडल ने 7 फरवरी 2016 में गजानन माधव मुक्तिबोध राष्‍ट्रीय सम्‍मान से सम्‍मानित किया था। उन्‍हें यह गौरवशाली सम्‍मान वरिष्‍ठ साहित्‍यकार श्रीनिवास विष्‍णु खांदेवाले ने दिया था। इस सम्‍मान के लिए ज्ञानरंजन का चयन साहित्‍यकारों की तीन सदस्‍यीय ज्‍यूरी डॉ. राजेंद्र मिश्र, डॉ. सुशील त्रिवेदी और तेजिंदर सिंह गगन ने किया था। उन्‍हें सम्‍मानित करते हुए उस समय हम लोग अपने आप को जितना गौरवान्वित महसूस कर रहे थे, उतने ही आज उनके निधन पर दुखी भी है।    
वरिष्‍ठ प्राध्‍यापक अनिल श्रीराम कालेले ने कहा कि ज्ञानरंजन ने 'घंटा', 'बहिर्गमन', 'अमरूद', 'पिता' जैसी कहानियों के माध्यम से हिंदी में कहानी लेखन को नया सलीका दिया। मध्यम वर्गीय पात्रों के जीवन के तमाम विरोधाभासों को अभिव्यक्त करने का उनकी विशेषता सर्वोत्‍कृष्‍ट थी। उनकी कहानियां सामाजिक जीवन की अनेक विरुपताओं को उजागर करती हैं। काले ने कहा कि साहित्यिक पत्रिका ‘पहल’ के संपादक ज्ञानरंजन का बुधवार को रात 10.30 बजे जबलपुर में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। साहित्‍य जगत में उनकी कमी हमेशा बनी रहेगी।
महाराष्‍ट्र मंडल में हुई श्रद्धांजलि सभा में उपाध्‍यक्ष गीता श्‍याम दलाल, सचिव चेतन दंडवते, आध्‍यात्मिक समिति की समन्‍वयक आस्‍था काले, सखी निवासी की प्रभारी नमिता शेष, वरिष्‍ठ जन सेवा समिति के प्रभारी दीपक पात्रीकर, वरिष्ठ अधिवक्‍ता प्रशांत देशपांडे सहित अनेक पदाधिकारी व आजीवन सभासद शामिल हुए। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध साहित्‍यकार विनोद कुमार शुक्‍ल को भी उनकी साहित्‍य‍िक कृतियों का स्‍मरण करते हुए श्रद्धांजलि दी गई।