दिव्य महाराष्ट्र मंडल

तात्यापारा स्थित हनुमान मंदिर में मनाया गया दासनवमी महोत्सव

- भजन मंडली के सदस्यों ने प्रस्तुत किए सुंदर भजन

- दासबोध परायण के साथ करुणाष्टक का हुआ पाठ

रायपुर। तात्यापारा स्थित हनुमान मंदिर में माघ कृष्ण नवमीं तिथि बुधवार 11 फरवरी को दास नवमी महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर तात्यापार की भजन मंडली ने सुंदर मराठी भजन प्रस्तुत किए। वहीं दासबोध का परायण और करुणाष्टक के पाठ ने आयोजन को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया।

बतादें कि छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु समर्थ रामदास स्वामी की पुण्यतिथि (माघ कृष्ण नवमी) पर महाराष्ट्रीयन समाज द्वारा दास नवमी महोत्सव मनाया जाता है। स्वामी रामदास को 'दासबोध' के रचयिता के रूप में जाना जाता है। इस अवसर पर विशेष पूजा, कीर्तन और सत्संग का आयोजन होता है, जो भक्त के समर्पण को दर्शाता है।यह महोत्सव यह समर्थ रामदास स्वामी को याद करने और उनके विचारों को आत्मसात करने का अवसर है।

महाराष्ट्र मंडल के आध्यात्मिक समिति की समन्यवक आस्था काले ने बताया कि बुधवार 11 फरवरी को मंदिर परिसर में दास नवमी महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु समर्थ रामदास स्वामी रचित ग्रंथराज दासबोध का परायण , मनोबोध, करुणाष्टक का पाठ किया गया। साथ ही भजन रामनामावली पाठ हुआ। इस अवसर पर छाया भवाळकर ने समर्थ रामदास स्वामीजी की जीवनी के बारे में बताते हुए कहा कि परमार्थ प्रसार के साथ ही राष्ट्र जागरण के लिए 1100  हनुमान मंदिर स्थापित किए।

चारुशीला देव ने दासबोध की प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रपंच और परमार्थ दोनों का तालमेल रख कर कार्य करना चाहिए, आलस्य को त्यागकर कठिन परिश्रम से ही सफलता मिलती है। भक्ति, ज्ञान और वैराग्य मानव जीवन को कृतार्थ बना सकते है। प्रभा हिशीकर, निशा राहटगांवकर और तात्यापारा भजन समूह द्वारा दासनवमी उत्सव वर्षों से मनाया जाता  है । इस अवसर पर महाराष्ट्र मंडल की आस्था काळे  और  नमिता शेष भी उपस्थित थी।

इस अवसर पर तात्या पारा भजन मंडल के सदस्य  कुमुद कान्हे, अल्पना मोहदीवाले,  अलका संत, ज्योति कान्हे एवं दासबोध अध्ययन वर्ग के सदस्य भी उपस्थित थे। हर मंगलवार शाम 6.30  बजे चारू शीला देव द्वारा दासबोध अध्ययन वर्ग संचालित किया जाता है , जिसमें समर्थ साहित्य का अध्ययन किया जाता है।