महाराष्ट्र मंडल के फिजियोथैरेपी में नूतन और चहक के स्वास्थ्य में हो रहा सुधार
- 15 दिनों में एक साल चहक बैठने लगी, चार साल का नूतन बोलने लगा
रायपुर। जन्मजात शारीरिक परेशानियों से जूझ रहे बच्चों को महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित फिजियोथैरेपी सेंटर महज 15 दिनों में राहत मिली। एक ओर जहां एक साल की चहक महज 15 दिनों में बैठने लगी और करवट बदलने ली है। वहीं चार साल का नूतन अब कुछ-कुछ बोलने लगा है। दोनों बच्चों में डेवलपमेंट देखकर दोनों के परिजनों ने काफी राहत महसूस की।
महाराष्ट्र मंडल मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि लगभग 15 दिन पहले मूलतः भानपुरी बस्तर निवासी अखिलेश्वरानंद ध्रुव और सरस्वती ध्रुव अपनी एक साल की बेटी चहक को लेकर यहां आए थे। एक साल की होने के बाद भी चहक बैठ नहीं पाती थी। बैठालने की कोशिश करने पर वह लुढ़क जाती थी। यहां 15-16 दिन तक ट्रीटमेंट लेने के बाद अब वह पलटने लगी है। वहीं पहले से ज्यादा एक्टिव है।

श्याम सुंदर खंगन ने आगे बताया कि वहीं शिवरीनारायण के कहते वाले भानू और अंजू कश्यप अपने चार साल के बेटे नूतन को लेकर 15-16 दिन पहले आए थे। हमारे डाक्टरों की मेहनत के परिणाम स्वरूप अब नहीं बोल पाने वाला नूतन कुछ शब्द बोलने लगा है। नूतन का सीधा हाथ नहीं चलता था, वह उसे मोड़कर ही रखता था। अब उस हाथ में मूवमेंट आ गया है। जमीन में बैठ नहीं पाता अब बैठने लगा है। नूतन के परिजनों और उसके दादा को नूतन में आए सुधार को देखकर अब अच्छा लगने लगा है।
खंगन ने आगे बताया कि महाराष्ट्र मंडल द्वारा दिव्यांग बालिका विकास गृह के सहायतार्थ फिजियोथैरेपी सेंटर का संचालन किया जा रहा है। यहां आने वाले मरीजों से नाममात्र की सहयोग राशि ली जाती है। फिजियोथेरेपी की सुविधा सुबह 9 बजे रात आठ बजे तक की है। महाराष्ट्र मंडल में फिजियोथेरेपी की सुविधा सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक डॉ. अंकिता काले के माध्यम से, दोपहर 12 बजे से चार बजे तक डॉ. संगीता कश्यप और शाम चार बजे से रात आठ बजे तक फिजियोथेरेपिस्ट डीके नेताम के माध्यम से यह सुविधा मिल रही है।