दिव्य महाराष्ट्र मंडल

मराठी सिखाने के लिए क्‍लासेस महाराष्‍ट्र मंडल की विशेषता: डॉ. रुईकर

'स्‍वराज से साम्राज्‍य तक' कार्यशाला के समापन पर एम्‍स की प्रोफेसर व विभागाध्‍यक्ष डॉ. मनीषा ने कहा- मराठी प्रचार को लेकर मंडल के कार्य प्रशंसनीय

रायपुर। ‘स्‍वराज से साम्राज्‍य तक' विशेष कार्यशाला में मुख्‍य अतिथि डॉ. मनीषा रुईकर ने कहा कि मराठी को लेकर महाराष्‍ट्र मंडल के कार्य प्रशंसनीय हैं। खासकर मराठी सिखाने को लेकर आप लोगों की जो मराठी क्‍लासेस चल रही है, वह एक बढ़िया प्रयास है। एम्‍स की प्रोफेसर और सामुदायिक चिकित्‍सा विभाग की अध्‍यक्ष डॉ. रुईकर ने कहा हमें अपनी अगली पीढ़ी को मराठी सिखानी ही चाहिए क्‍योंकि भाषा का संबंध संस्‍कृति और परंपराओं को आगे ले जाने से भी होता है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि हम घर में मराठी में बातचीत करें और अपना पूरा व्‍यवहार मराठी में ही करें।
 
डॉ. रुईकर ने मराठी में दिए अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि महाराष्‍ट्र मंडल को अपने सभासदों के घरों में जाकर हमारे सभासद मराठी में बात कर रहे हैं या नहीं, इस बात की पड़ताल करनी चाहिए। जिस घर में मराठी का वातावरण नहीं है, वहां अभिभावकों से लेकर बच्‍चों तक को मराठी क्लासेस जॉइन करवाने सहित और भी जरूरी कोशिशें करनी चाहिए। पूरा प्रयास होना चाहिए कि मंडल में सभी कार्यक्रम मराठी में ही हो। ठीक है यह कार्यशाला बाहरी गैरमराठी भाषी लोगों के शामिल होने की संभावना के कारण हिंदी में लगाई गई है। 
 
इस मौके पर श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक मंडल, पुणे के कार्यवाह व मुख्‍य वक्‍ता सुधीर थोरात ने कहा कि हमें एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हिंदवी स्‍वराज के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके वंशजो का संघर्ष सिर्फ मराठों के लिए नहीं बल्कि समूचे हिंदु समाज के लिए था। जहां- जहां मराठा राजा- पेशवा युद्ध करते हुए आगे बढ़े, वो- वो जगह आज भी हिंदुस्‍तान के नक्‍शे पर है। अटक से कटक तक साम्राज्‍य का आधार भी यही है। मराठे पूर्वी बंगाल तक तो गए लेकिन पश्चिम बंगाल नहीं जा पाए।परिणामस्‍वरूप पश्चिम बंगाल पहले पूर्वी पाकिस्‍तान और बाद में बंगलादेश बन गया।
 
कार्यशाला के अंतिम दिन मुख्य अतिथि डॉक्टर मनीषा रुईकर का महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले, सचिव चेतन गोविंद दंडवते सहित कार्यकारिणी सदस्यों ने सूत माला, शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह देकर कर सम्मान किया। इसी तरह छत्रपति शिवाजी महाराज कार्यक्रम आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने पुणे से यहां पहुंचे सुधीर थोरात और विक्रम सिंह मोहिते को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन समिति के समन्वयक अभिषेक विद्याधर बक्षी ने किया। आभार प्रदर्शन गणेशा जाधव पाटिल और रीना बाबर ने किया।