बारिश में बढ़ता है वात दोष.... पाचन शक्ति कमजोर होने पर पंचकर्म उपयुक्तः डॉ. पपीता
2026-07-22 11:41 AM
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रायपुर। बारिश के दिनों में लोगों का स्वास्थ्य खराब होना आम बात है। ज्यादातर लोग सर्दी, खांसी, बुखार जैसी वायरल बीमारियों से पीड़ित होते है और डाक्टरी सलाह या खुद से एलोपैथिक मेडिसिन लेकर खा लेते है। लेकिन उन लोगों को यह बिल्कुल एहसास नहीं होता है कि बारिश के मौसम में बीमार होने का सबसे बड़ा कारण खानपान में लापरवाही होता है। बारिश के दिनों में ज्यादा वसायुक्त भोजन कहीं न कहीं बीमारियों को न्यौता देता है। वहीं आयुर्वेद के अनुसार बारिश के दिनों में लोगों में वात दोष की शिकायत बढ़ जाती है तथा पाचन शक्ति (अग्नि) कमजोर हो जाती है। इस समय शरीर में रोगों की संभावना अधिक रहती है। इसलिए आयुर्वेद में बारिश के मौसम में पंचकर्म, विशेषकर बस्ती कर्म के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल की सभासद और जनरल फिजिशियन, आयुर्वेद तज्ञ , गर्भसंस्कार कोच डॉ. पपीता ब्राह्मणे ने व्यक्त किए।
डॉ. पपीता ब्राह्मणे ने आगे कहा कि आमतौर पर लोग पंचकर्म के लिए तभी आते है तब उनकी समस्या ज्यादा बड़ी या एलोपैथिक दवाईयों से मिली राहत से वे संतुष्ट न हो। पंचकर्म आयुर्वेद की एक विशेष शोधन (Detoxification) एवं शुद्धिकरण चिकित्सा है, जिसका उद्देश्य शरीर में संचित दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करना तथा विषैले पदार्थों (आम) को बाहर निकालना है। पंचकर्म केवल शरीर की सफाई ही नहीं करता, बल्कि रोगों की रोकथाम, उपचार तथा स्वास्थ्य संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉ. पपीता ब्राह्मणे ने कहा कि पंचकर्म के पांच प्रमुख प्रकार है। जैसे वमन यानी कफ दोष का शोधन, विरेचन मतलब पित्त दोष का शोधन, बस्ती से वात दोष का प्रमुख उपचार होता है। वहीं नस्य से नाक के माध्यम से सिर एवं गर्दन के रोगों का उपचार और रक्तमोक्षण के माध्यम से चयनित रोगियों के दूषित रक्त का शोधन किया जाता है। पंचकर्म वात दोष को संतुलित करता है। शरीर से विषैले तत्व (आम) बाहर निकालता है। जोड़ों एवं कमर के दर्द में लाभकारी। इम्युनिटी पावर बढ़ाता है औरपाचन शक्ति में सुधार करता है।
डॉ. पपीता ब्राह्मणे ने कहा लोगों को स्वस्थ्य रहने के लिए बारिश के दिनों में अपने भोज्य पदार्थों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बारिश के दिनों में हल्का एवं ताज़ा भोजन करें, मूंग दाल की खिचड़ी, गरम सूप, पुराना चावल एवं गेहूँ, उबला या गुनगुना पानी, अदरक, जीरा, धनिया, हल्दी, काली मिर्च जैसे मसालों का सीमित उपयोग, मौसमी सब्जियाँ अच्छी तरह पका कर खाना चाहिए। इन दिनों बासी भोजन, तला-भुना एवं अत्यधिक मसालेदार भोजन, ठंडे पेय एवं बर्फ, अत्यधिक दही (विशेषकर रात में), फास्ट फूड एवं जंक फूड, अधिक मिठाई एवं भारी भोजन से परहेज करना चाहिए।