दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्‍ट्र मंडल में कांदे नवमी उत्‍सव 23 को, गीत-गजल की प्रस्‍तुतियों के साथ भरपूर मनोरंजन

 रायपुर। महाराष्‍ट्र मंडल में गुरुवार, 23 जुलाई को कांदे नवमी का उत्‍सव आयोजित किया गया है। शाम छह बजे शुरू होने वाले संस्कृति समिति के इस उत्‍सव में पहले 26 जुलाई को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों को लेकर पदाधिकारियों की बैठक होगी। उसके तत्‍काल बाद कार्यकारिणी सदस्‍यों, पदाधिकारियों सहित सभासदों की व्‍यक्तिगत संगीतमय प्रस्‍तुतियां होंगी। साथ ही अन्‍य कुछ सभासद स्‍टैंडअप कामेडी भी करेंगे। उत्‍सव का समापन प्‍याज से बने सुस्‍वाद व्‍यंजनयुक्‍त रात्रिभोज से होगा।

 

सचिव चेतन गोविंद दंडवते ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को 'कांदे नवमी' (या भड़ली नवमी) कहा जाता है, जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र में पारंपरिक रूप से मनाई जाती है। चार्तुमास शुरू होने से दो दिन के बाद आषाढ़ी एकादशी मनाई जाती है। महाराष्‍ट्र में आषाढ़ी एकादशी में आमतौर पर गीतों, भजनों का संगीतमय कार्यक्रम होता है। यही परंपरा महाराष्‍ट्र मंडल में भी निभाई जाती है। जहां से चातुर्मास (चार पवित्र महीने) शुरू हो जाता है। इस दौरान प्याज, लहसुन, बैंगन और मांसाहार पूरी तरह वर्जित माना जाता है।
 
दंडवते के अनुसार छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में मजेदार चुटकुलों, गानों और मनोरंजक किस्‍सों के बाद रात्रिभोज में प्‍याजी पकौड़े, प्‍याजी झुनका, प्‍याज-ककड़ी कचूंबर सहित अनेक व्‍यंजन विशेष रूप रात्रिभोज की विशेषता होंगे। वैसे कांदे नवमी पर प्‍याजी पोहे, प्याजी थालीपीठ और भरवां बैंगन, बैंगन का भरता जैसे व्‍यंजन भी अनेक मराठी परिवारों में आमतौर पर विशेष रूप से बनाए जाते हैं। 
मंडल सचिव ने बताया कि चार्तुमास में प्‍याज, लहसुन और बैंगन और मांसाहार को वर्जित माने जाने की बड़ी वजह मानसून के दौरान पाचन क्रिया कमजोर होना है। आयुर्वेद में भी माना गया है कि मानसून यानी चातुर्मास के दौरान शरीर में वात और पाचन क्रिया कमजोर होती है। प्याज और बैंगन जैसे भारी (वातवर्धक) भोजन से पेट संबंधी रोग हो सकते हैं, इसलिए अगले चार महीने इन्हें न खाने की सलाह विशेषज्ञ आयुर्वेदिक डॉक्टर्स देते हैं।