दिव्य महाराष्ट्र मंडल

बिंबाजी भोंसले छत्तीसगढ़ के पहले मराठा शासक.... शिवाजी मराठों के नहीं हिंदूओं के राजा थेः सुधीर

- ‘हिंदवी स्वराज्य से साम्राज्य तक’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन वक्ता सुधीर थोराट ने रखे विचार

रायपुर। हिंदवी स्वराज की स्थापना शिवाजी महाराज ने 1645 में रखी, लेकिन इसका विस्तार 1674 से 1818 तक माना जाता है। वहीं छत्तीसगढ़ में मराठा साम्राज्य का आगमन 1741 में नागपुर के भोंसला शासकों के सेनापति भास्कर पंत के आक्रमण के साथ हुआ। उन्होंने रतनपुर के कलचुरी शासक रघुनाथ सिंह को हराकर मराठा सत्ता की नींव रखी। 1758 में बिंबाजी भोंसला ने प्रत्यक्ष मराठा शासन स्थापित किया। जिसके बाद यह क्षेत्र 1854 तक भोंसला राज्य का हिस्सा रहा। पेशवाओं के शासन के दौरान अंग्रेजों के साथ हुए तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध में हार के बाद इस साम्राज्य का अंत हुआ। जिसके बाद छत्तीसगढ़ सीपी बरार कहलाया। उक्त विचार महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में ‘हिंदवी स्वराज्य से साम्राज्य तक’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक मंडल पुणे के कार्यवाह सुधीर थोराट ने इस आशय की जानकारी दी।

सुधीर थोराट ने कार्यशाला के दूसरे दिन 18वीं सदी में मराठा और मुगल शासकों के इतिहास के बारे में बताया।  संभाजी महाराज के बेटे छत्रपति शाहू महाराज ने मराठा साम्राज्य के पुनरुत्थान और पेशवा प्रणाली की नींव रखी थी। उनका जीवन बेहद संघर्षपूर्ण और साहसी रहा है। संभाजी महाराज की मृत्यु के बाद शाहू जी महाराज और महारानी येशूबाई मुगलों के पास कैद था। इस दौरान संभाजी महाराज के छोटे भाई राजाराम जी महाराज और उनकी पत्नी तारा बाई ने जिंजी से सत्ता संभाली और मुगलों को काफी परेशान किया। 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगलों ने मराठों में फूट डालने के लिए शाहू महाराज को रिहा कर दिया। उस समय मराठा गद्दी पर उनकी चाची ताराबाई और उनके बेटे का शासन था। शाहू महाराज ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया और 1707 में कोरेगांव की लड़ाई में विजय प्राप्त कर सतारा में अपना शासन स्थापित किया। इससे मराठा साम्राज्य दो भागों (सतारा और कोल्हापुर) में बंट गया।

सुधीर थोराट ने आगे कहा कि शाहू महाराज के शासनकाल में मराठा साम्राज्य का बहुत विस्तार हुआ। उन्होंने प्रशासन को सुव्यवस्थित किया और 'पेशवा' पद की शुरुआत की। उन्होंने बालाजी विश्वनाथ और बाद में बाजीराव प्रथम को अपना पेशवा नियुक्त किया, जिनके नेतृत्व में मराठा साम्राज्य ने पूरे भारत में अपनी विजय पताका फहराई। शाहू महाराज एक बेहद न्यायप्रिय, दयालु और दूरदर्शी शासक थे।  (स्वराज) के विस्तार के दौरान मालवा और बुंदेलखंड क्षेत्र रणनीतिक और भौगोलिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण थे। पेशवा बाजीराव के नेतृत्व में मराठों ने इन क्षेत्रों में मुगल आधिपत्य को समाप्त कर 'स्वराज' का विस्तार किया, जिससे मराठा साम्राज्य उत्तर भारत में एक प्रमुख शक्ति बन गया पेशवा बाजीराव ने 1728 में पालखेड़ की लड़ाई जीतने के बाद मालवा में मराठा प्रभाव बढ़ाना शुरू किया। 1732 में पेशवा के भाई चिमाजी अप्पा ने मालवा की यात्रा कर प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया।