‘प्रथम तुला वंदितों...’ से शुरू हुआ ‘अभंगवारी’ देर तक जारी रहा
2026-07-27 05:34 PM
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0- महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में आषाढ़ी एकादशी पर भक्तिमय गीतों- भजनों का हुआ सुमधुर संगीतमय कार्यक्रम
रायपुर। गणेश वंदना ‘प्रथम तुला वंदितो कृपाळा, गजानना गणराया’ के सामूहिक गायन के साथ शुरू हुआ सुमधुर भक्तिमय ‘अभंगवारी’ देर तक महाराष्ट्र मंडल के संगीत रसिकों को मंत्रमुग्ध करता रहा। मंडल के सर्वाधिक प्रतिष्ठित व स्थापित संगीतमय कार्यक्रमों में से एक आषाढ़ी एकादशी पर आयोजित विट्ठल पांडुरंग की भक्ति का यह कार्यक्रम संत ज्ञानेश्वर सभागृह में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं की उपस्थिति में हुआ। चंद्रशेखर सुरावधनी के मागदर्शन में हुए अभंगवारी में बेहद सधा हुआ मंच संचालन गौरी क्षीरसागर ने किया।

महाराष्ट्र मंडल के सुप्रसिद्ध गायक बंधु रमेश और सुरेश पालकर के साथ अध्यक्ष अजय मधुकर काले व अनिल कालेले ने मां सरस्वती के फोटो पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलन कर 'अभंगवारी' का शुभारंभ किया। इस भक्ति संगीतमय कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक भजनों व भाव गीतों की प्रस्तुतियों का दौर काफी देर चक चलता रहा। गणेश वंदना के सुंदर सामूहिक गायन के साथ ही सरस्वती वंदना में भी सभी गायकों- गायिकाओं ने स्वर देकर ‘अभंगवारी’ का परंपरागत आगाज किया। चंद्रशेखर सुरावधनीवार की ‘ज्ञानीयांचा राजा….’ और ‘विष्णुमय जग’ की दिलकश पेशकश से सभागृह तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम की गरिमा के अनुसार ही कल्याणी देसाई ने ‘टाळ बोले चिपळीला…’ की समधुर प्रस्तुति से ध्यान खींचा। उन्होंने अपनी प्रभावी आवाज से ‘बोलावा विठ्ठल...’ से भी श्रोताओं को भी 'विट्ठल, विट्ठल, विट्ठल, विट्ठल' का उच्चारण करवा कर अपने गीत में शामिल कर लिया।
मराठी भक्ति और भाव गीतों के लिए प्रसिद्ध हिना देशपांडे ने अपने नाम के अनुरूप ‘सुंदर ते ध्यान...’ और ‘अबीर गुलाल उधळित रंग... की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। श्रीकांत कोरान्ने ने ‘देह विठ्ठल-विठ्ठल झाला…’ से भक्ति संगीत में अपनी प्रभावी पहचान छोड़ी। अंजलि कान्हे ने ‘देव देवरह्यात नाही’ की जानदार प्रस्तुति से दर्शकों को गुनगाने के लिए बाध्य कर दिया। इसी तरह एक के बाद एक भजनों की स्वर लहरियों में रसिक श्रोता देर तक रमे रहे।