दिव्य महाराष्ट्र मंडल

एक ही मां की तीन संतानों को हुई थी एक साथ फांसीः चारुशीला देव

- महाराष्ट्र मंडल में चौबे कालोनी केंद्र द्वारा हुआ राष्ट्रीय कीर्तन
रायपुर। देश की आजादी की लड़ाई में न जाने कितने वीर सपूतों ने अपने जान की कुर्बानी दी। कितने के तो नाम ही लोगों को नहीं पता। आजादी की इस लड़ाई में एक ही मां की तीन संतानों को अंग्रेजों ने एक साथ फांसी पर चढ़ा दिया था।  आज हमें इन वीर सपूतों के बारे में युवा पीढ़ी को बताने की जरुरत है। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति और चौबे कालोनी महिला केंद्र द्वारा महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में आयोजित राष्ट्रीय कीर्तन में ह.भ.प. चारूशीला देव ने कहीं। 

चारूशीला देव ने कहा कि 22 जून 1897 को अंग्रेज अधिकारी रैंड को मौत के घाट उतार कर आजादी की लड़ाई में प्रथम क्रांतिकारी धमाका करने वाले वीर दामोदर पंत चाफेकर का जन्म 24 जून 1869 को पुणे के ग्राम चिंचवड़ में प्रसिद्ध कीर्तनकार हरिपंत चाफेकर के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में हुआ था। उनके दो छोटे भाई क्रमशः बालकृष्ण चाफेकर एवं वसुदेव चाफेकर थे। बचपन से ही सैनिक बनने की इच्छा दामोदर पंत के मन में थी, विरासत में कीर्तनकार का यश-ज्ञान मिला ही था। महर्षि पटवर्धन एवं लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक उनके आदर्श थे। 
दामोदर हरि चापेकर, बालकृष्ण हरि चापेकर तथा वासुदेव हरि चापेकर सगे भाई थे जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना बलिदान दिया। तीनों भाइयों को संयुक्त रूप से चापेकर बन्धु कहा जाता है। 

चारूशीला देव कीर्तन में आगे बताया कि वर्ष 1897 में पुणे में प्लेग महामारी विकराल रूप धारण कर रही थी। महामारी से मुक्ति के लिए जब अंग्रेज अधिकारियों ने कोई खास प्रयास नहीं किया, तो इस स्थिति को देखते हुए तिलक जी के परामर्श से तीनों भाइयों ने क्रांति का मार्ग चुन लिया। साथ ही संकल्प किया कि वे प्लेग कमिश्नर वाल्टर चाल्र्स रैंड और एक अन्य अधिकारी अयस्र्ट का वध करके ही दम लेंगे। 22 जून, 1897 को महारानी विक्टोरिया का 60वां जन्मदिन हीरक जयंती के रूप में पुणे के गवर्नमेंट हाउस में मनाया जाना था। सूचना थी कि अंग्रेज अधिकारी रैंड और अयस्र्ट भी इस आयोजन में सम्मिलित होंगे। इस अवसर का लाभ उठाकर दामोदर हरि चाफेकर एवं बालकृष्ण हरि चाफेकर के साथ उनके मित्र विनायक रानाडे वहां पहुंचे। दामोदर हरि चाफेकर ने कमिश्नर रैंड की बग्घी पर चढ़कर उसे गोली मार दी व बालकृष्ण हरि चाफेकर ने अयस्र्ट को गोलियों से छलनी कर दिया।
 

इससे पूर्व कीर्तन में संत तुकाराम महाराज के अभंग का विवेचन किया गया। जिसमें उन्होंने कहा कि दया का भाव सिर्फ भूखों को खाना खिलाना और प्यासे को पानी पिलाना नहीं होगा। संकट ग्रस्त लोगों की मदद करना भी सेवा का भाव है।  कीर्तन में हारमोनियम में शुभदा गिरजे और तबले पर राकेश देशमुख ने संगत दी। इस अवसर पर मंडल की कार्यकारिणी सदस्य  आस्था काले, मालती मिश्रा विशेष रुप उपस्थित थीं। कार्यक्रम  आध्यात्मिक समिति की समन्वयक सृष्टि दंडवते, सह महिला प्रमुख प्रिया बक्षी, मनीषा वरवंडकर, चौबे कालोनी केंद्र की संयोजिका अक्षता पंडित, सह संयोजिका स्वाति डबली, संगीता निमोणकर, अनुपमा बोधनकर और प्राची डोनगांवकर सहित बड़ी संख्या में चौबे कालोनी केंद्र और आध्यात्मिक समिति की महिलाएं उपस्थित थीं।