दिव्य महाराष्ट्र मंडल

‘कला की कोई भाषा नहीं होती…भावों को समझकर हाथों ने उकेरे गणपति बप्पा

-          महराष्ट्र मंडल में मिट्टी के गणेश निर्माण की कार्यशाला संपन्न

-          दिव्यांग बालिका में निवासरत मूकबधिर बच्चियों ने बनाएं सुंदर प्रतिमाएं

रायपुऱ। महाराष्ट्र मंडल परिसर में आयोजित गणेश की मूर्ति बनाने की कार्यशाला में अद्भुत नजारा देखने को मिला। जहां एक तरफ आम बच्चों का शोर था, वहीं दूसरी तरफ मूकबधिर बच्चों की ऐसी अद्भुत शांति और रचनात्मकता थी कि सभी अचंभित हो उठे। मंडल परिसर में आयोजित मिट्टी के गणेश बनाने की कार्यशाला में मंडल के दिव्यांग बालिका विकास गृह में निवासरत मूकबधिर बच्चियों ने बिना एक शब्द बोले, सिर्फ अपने हाथों के भावों (साइन लैंग्वेज) और बोलने में समझ गुरु के इशारों को समझकर मिट्टी से भगवान गणेश की अत्यंत सुंदर मूर्तियाँ बनाई। मंडल अध्यक्ष अजय काले ने सभी बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यशाला के ट्रेनर और मंडल के सहसचिव अजय पोतदार ने बच्चों को मिट्टी को आकार देने की कला सिखाई। उन्होंने जैसे ही अपने हाथों से बप्पा की सूंड, कान और मुकुट बनाने का इशारा किया, बच्चों की आँखों में एक चमक सी आ गई। बच्चों ने प्रशिक्षक के हाथों की हर हरकत को इतनी बारीकी से देखा और समझा कि कुछ ही देर में उनके नन्हें-नन्हें हाथों ने मिट्टी के ढेरों को सुंदर मूर्तियों में बदल दिया।

मूर्ति निर्माण के लिए पूरी तरह से प्राकृतिक मिट्टी का उपयोग किया गया। इन बच्चों ने न केवल मूर्ति बनाना सीखा, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण (Eco-Friendly) का एक बड़ा संदेश भी दिया। सभी मूर्तियों में मंडल की पर्यावरण समिति की ओर से शीड बाल डाले गए। ताकि विसर्जन के बाद उस मिट्टी से एक पौधा जन्म लें।

जब इन बच्चों की बनाई मूर्तियाँ पूरी तरह तैयार हो गईं, तो उनके चेहरों की खुशी देखने लायक थी। भले ही वे बोल नहीं सकते थे, लेकिन उनकी आँखों की चमक, चेहरे की मुस्कान और बप्पा के सामने जुड़े उनके हाथ यह बता रहे थे कि वे मन ही मन कितने उत्साहित और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। इस अवसर पर मंडल उपाध्यक्ष गीता दलाल, कार्यकारिणी सदस्य मालती मिश्रा, प्रवीण क्षीरसागर, आर्टिस्ट शेखर क्षीरसागर सहित बड़ी संख्या में सभासद उपस्थित थे।