दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्ट्र मंडल महज एक संस्थान नहीं... एक मिशन है, जिसे आगे बढ़ाते रहना... मंडल के प्रत्येक सदस्य का दायित्व

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय काले ने रविवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान अध्यक्षीय संबोधन दिया। उन्होंने महाराष्ट्र मंडल को महज एक सामाजिक संस्थान ना मानते हुए इसे 'मिशन' की संज्ञा दी। अध्यक्ष काले ने कहा कि बीते 40 वर्षों में महाराष्ट्र मंडल ने मिशन के तहत काम किया है, जिसकी वजह से आज इस संस्थान ने अपनी पहचान और मिसाल पेश की। 

उन्होंने महाराष्ट्र मंडल के प्राथमिक भवन से लेकर वर्तमान के आधुनिकतम और सुविधा संपन्न इमारत को लेकर कहा कि यह इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि महाराष्ट्र मंडल से जुड़ने वाले प्रत्येक सदस्य ने उस स्तर पर जाकर खुद को साबित किया, अपना संपूर्ण योगदान मंडल को दिया और पूरे सामर्थ्‍य के साथ हर वक्त खड़ा रहा। 

मंडल अध्यक्ष अजय काले ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल का अपना भवन होना चाहिए, एक सोच थी, जिसे पूर्वजों ने आगे बढ़ाया। नई पीढ़ी ने सोच स्थापित की कि मंडल का एक आदर्श भवन होना चाहिए, जहां आने वाले हर किसी को यह लगे कि हम अपना कार्यक्रम इसी भवन से करेंगे, तो उस सोच को हकीकत में बदलने का काम इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि महाराष्ट्र मंडल के प्रत्येक सदस्य ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। 
 

बता दें कि महाराष्ट्र मंडल में रविवार को सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। इस समारोह में मेधावी छात्र—छात्राओं के साथ ही मंडल के वरिष्ठ सदस्यों के सम्मान का भी आयोजन किया गया था, तो नए सदस्यों का स्वागत समारोह भी इसमें शामिल था। इस अवसर पर मंडल के अध्यक्ष काले ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि महाराष्ट्र मंडल से जुड़ने वाले प्रत्येक सदस्य को इस सोच को आगे बढ़ाना है। 

उन्होंने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदस्यता शुल्क का भुगतान मात्र कर देना ही महाराष्ट्र मंडल के सदस्य होने की प्रमाणिकता नहीं है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में आगे बढ़कर हिस्सा लेना, नई सोच और विधाओं को आगे लाना, प्रेरित करना, सामाजिक संरचना और संरक्षण भी निहायत जरुरी है। उन्होंने कहा कि जब हम आगे बढ़ेंगे, मिलकर आगे बढ़ेंगे, तब हमारा मंडल ज्यादा तेजी से अग्रसर होगा और मील का पत्थर साबित होगा।