आचार्य दंडवते ने बताया... मानव जन्म को सार्थक करने का सरल उपाय... इस जन्माष्टमी से कर ले प्रारंभ
2023-09-05 03:33 PM
670
रायपुर। कलयुग जितने कष्टों से भरा हुआ है, उतना ही सरल मार्ग भी इस भवसागर को पार करने के स्वयं ईश्वर ने सुझाया है। कहा गया है कि सिर्फ हरि के नाम के स्मरण मात्र से कलयुग में कई यज्ञों का फल प्राप्त हो जाता है। सनातन धर्म में सालभर कई ऐसे अवसर आते हैं, जब हम भगवान की भक्ति में अपना समय व्यतीत करते हैं।
हाल ही में 19 सालों के बाद संयोग आया था, जब श्रावण के साथ पुरुषोत्तम मास का योग बना था। यानी देवाधिदेव महादेव और भगवान विष्णु की एक साथ सेवा और उपासना का समय मिला था। अब एक बार फिर अवसर आया है, जब जगत पालनहार भगवान विष्णु के अष्टम अवतार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारी चल रही है।
महाराष्ट्र मंडल के आचार्य चेतन दंडवते ने बताया कि हर साल भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव घर से लेकर मंदिरों तक में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। लोग अपने बच्चों को कृष्ण की पोषाक बनाकर दुलारते हैं, तो तरह—तरह के आयोजन भी होते हैं। यह सब सनातन धर्म के पर्याय हैं। इन माध्यमों से हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को पोषित कर आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
इसके साथ ही आचार्य दंडवते ने कहा कि मानव जीवन को सार्थक करने के लिए यूं तो हरि का नाम ही पर्याप्त है, पर अवसरों को हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र की उस शुभ घड़ी में एक दीपक भगवान कृष्ण के मंदिर में जला आएं, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यदि आपके निकट में भगवान कृष्ण का मंदिर नहीं है, तो भी कोई परेशानी की बात नहीं है, जो भी मंदिर हो, वहां पर भी उनके नाम का एक दीपक जलाया जा सकता है।
आचार्य दंडवते ने पूछने पर बताया कि यदि मंदिर तक जाने की परिस्थितियां नहीं बन पा रही है, तो घर में आप जहां प्रतिदिन पूजा करते हैं, नियमित दीपक प्रज्जवलित करते हैं, वहीं पर ठीक उस समय, जब द्वापर में भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था, यानी मध्यरात्रि की शुभ बेला पर, तो भी वह श्रीहरि को समर्पित हो जाता है।