श्रीकृष्ण ग्रहण करेंगे आपका लगाया भोग... आचार्य दंडवते ने बताया... क्या है तरीका
2023-09-06 09:55 AM
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर तिथियों का भ्रम ज्योतिषाचार्यों ने पहले ही दूर कर दिया है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म 6—7 सितंबर की मध्य रात्रि में होगा, और जन्मोत्सव 7 सितंबर को मनाया जाएगा। ऐसी में भगवान को ध्यान में रखकर गृहस्थ वालों के लिए व्रत पालन 6 सितंबर को उचित है, वहीं वैष्णव संप्रदाय के लोगों के लिए व्रत पारण 7 सितंबर बताया गया है।
भगवान विष्णु ने द्वापर युग में भाद्रमास के कृष्णपक्ष में अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि बाललीला के लिए कृष्ण के रूप में अवतार लिया था। तब से कृष्ण जन्माष्टमी की परंपरा चली आ रही है। बालकृष्ण को जन्म से ही ग्वाल, गोपियों और गायों का साथ पसंद रहा है। वे अपनी टोली में इन सभी को हमेशा साथ रखते थे। जो खुद खाते थे, इन सभी को खिलाया करते थे।
महाराष्ट्र मंडल के सचिव व आचार्य चेतन दंडवते ने बताया कि कलयुग में मानव जीवन को इस भवसागर से मोक्ष दिलाने के लिए गौवंश आज भी हमारे पास मौजूद है। उन्होंने बताया कि गौमाता के मस्तक, कंठ, पीठ और पूंछ में देवताओं का वास है। उन्होंने बताया कि गौमाता को पहली रोटी खिलाने का आशय यही है कि हमारी रसोई में बनने वाले भोजन का पहला अंश भगवान को भोग लग जाए।
उन्होंने कृष्ण जन्माष्टमी के इस पावन पर्व पर कहा कि भगवान कृष्ण को पंजरी, पंचामृत, नाना प्रकार के मिष्ठान, माखन मिश्री इत्यादि पसंद थे। ऐसे में जब भगवान को आज के समय में भोग लगाना है, तो वे स्वयं आकर उस भोग को ग्रहण नहीं करेंगे, पर गौमाता को लगाया हुआ भोग, उन्हें खिलाया गया प्रत्येक निवाला सीधे श्रीकृष्ण के श्रीमुख को प्राप्त होता है। इस तरह से आपका लगाया भोग श्रीकृष्ण को सीधे लग जाता है। इससे उनकी असीमित कृपा के आप पात्र बन सकते हैं।