दिव्य महाराष्ट्र मंडल

'सिटी के साथ ही नागरिकों का भी स्मार्ट होना जरूरी'.... महाराष्ट्र मंडल के नागरिक संवाद में वक्ताओं ने रखें विचार

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के नागरिक संवाद कार्यक्रम में पहुंचे वक्ताओं अमिताभ दुबे, शिल्पा नाहर, प्रवीण जैन, डाॅ. बाला कृष्णन, नितिन श्रीवास्तव और मनीष पिल्लीवार ने बताया कि कैसे स्मार्ट बनेगी हमारी स्मार्ट सिटी रायपुर। साथ ही अपनी स्मार्ट सिटी के लिए हमें भी मानसिक, शारीरिक और वैचारिक रूप से कितना स्मार्ट होना पड़ेगा। 
 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंडल के वरिष्ठ आजीवन सभासद विजय निमोणकर ने आज से 50-60 साल पहले की रायपुर की तस्वीर खींची और कहा कि आज के वक्ता हमें बताएंगे कि हमारी स्मार्ट सिटी कैसे होगी और अगले 50 साल का इसका क्या प्लान होगा। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ नितिन श्रीवास्तव ने कहा कि हमारी स्मार्ट सिटी को स्मार्ट बनाने के लिए हम सबको मानसिक रूप से स्ट्रांग होना होगा। घर से निकलते ही ट्रैफिक, अव्यवस्था को देखकर हम परेशान होते हैं। लेकिन इस परेशानी का कारण कहीं न कहीं हम ही हैं। हमें इसे सुधारने के लिए पहले खुद मानसिक रूप से तैयार होना होगा, तभी इसमें सुधार आ सकता है। 
 
महिलाओं के बीच आत्म सुरक्षा को लेकर सशक्तीकरण पर कार्यशाला लेने वाली शिल्पा नाहर ने कहा कि आज स्मार्ट सिटी में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कारगर उपाय बेहद जरूरी है। घर से बाहर निकलने वाली महिलाएं देर रात तक काम से घर लौटती हैं, तो उन्हें भी अपनी सुरक्षा को लेकर सजग होना जरूरी है। शहर में पेट्रोलिंग और चौक- चौराहों पर कैमरे होने के बाद भी महिलाएं कहीं न कहीं असुरक्षित हैं। शिल्पा ने लड़कियों, युवतियों व महिलाओं से अपील की कि अगर आप कभी किसी परेशानी में फंस जाएं तो आप अपनी तर्जनी ऊंगली से सीधे उसकी आंखों में प्रहार करें। चिंता न करें, आंखों को कुछ नहीं होगा, लेकिन वह कुछ देर के लिए विचलित जरूर हो जाएगा। इस बीच आपको बच निकलने का मौका मिल जाएगा। 
 
राजधानी में ग्रीन आर्मी का गठन कर पर्यावरण को बचाने के लिए संघर्षरत वक्ता अमिताभ दुबे ने कहा कि आज हम पर्यावरण की रक्षा के लिए पेड़ लगाते है, उनमें से सिर्फ 20 फीसद पौधे बच पाते है। आज पेड़ों के साथ जल संरक्षण की आवश्यकता अधिक है। राजधानी के तालाब लगातार पाटे जा रहे हैं। इन तालाबों का संरक्षण बेहद आवश्यक है। यह काम तीन स्तर पर होगा पहला शासन- प्रशासन, दूसरा समाजसेवी संगठन और तीसरा आम नागरिक। जब तक तीनों बराबरी और जिम्मेदारी से यह काम जिम्मेदारी से नहीं करेंगे तब तक पर्यावरण को लेकर चिंता बनी रहेगी। 
 
स्मार्ट सिटी में यातायात व्यवस्था पर अपने विचार रखते हुए वक्ता प्रवीण जैन ने कहा कि आज घर से बाहर निकलते ही सबसे बड़ी समस्या यातायात की ही है। इस समस्या से निजात पाने का सबसे बड़ा उपाय फूटपाथ है। फूटपाथों के निर्माण के लिए हमें सरकार की राह नहीं देखनी चाहिए बल्कि आपस में मिलकर अपने घर से सामने फूटपाथ बनाना चाहिए। कार्नर टू कार्नर एक लेबल पर फूटपाथ बनाने से हमें यातायात की बड़ी समस्या से काफी राहत मिलेगी। 
 
डाॅ. बाला कृष्णन ने स्मार्ट सिटी में से स्मार्ट का मतलब बताया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट में एस सेंसेबल (समझदार) का होता है। एम का मतलब मेंटल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य) होता है। ए का अर्थ एयर एंड न्यूट्रिशन (हवा और पोषण) है। आर का आशय रेस्ट (आराम) से है। प्रत्येक व्यक्ति को हर हालत में छह से आठ घंटे की नींद लेनी ही चाहिए। इसी तरह स्मार्ट में अंतिम अक्षर टी का मतलब टेंशन फ्री लाइफ (तनाव मुक्त जीवन) है। डाॅ. बाला कृष्णन ने कहा कि यदि हम घर से ही स्मार्ट बनने की प्रक्रिया शुरू करें और घर से बाहर भी सतत् इसे जारी रखें तो हमारे शहर को भी स्मार्ट बनने में देर नहीं लगेगी। 
 
कार्यक्रम के अंत में आर्टिटेक्ट मनीष पिल्लीवार ने कहा कि कवर्ड नालियां और बिजली के तारों के मकड़जाल को दूर करने के लिए सतत् काम जारी है। नया रायपुर में खाली जमीन मिली, तो उसे विकसित करने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई, लेकिन हमारा शहर काफी पुराना है। ऐसे में इसे स्मार्ट बनाने में काफी दिक्कतें और व्यावहारिक अड़चन हैं। फिर भी प्रशासन लगातार अच्छा काम कर रहा है। ट्रैफिक सिग्नल से लेकर सभी चीजें अब अपडेटेड लगाई जा रही हैं।
मंच का संचालन महाराष्ट्र नाट्य मंडल के सचिव प्रसन्न निमोणकर ने किया। इससे पहले अध्यक्ष अजय काले ने अध्यक्षीय संबोधन किया। कार्यक्रम के संयोजक रविंद्र ठेंगड़ी ने स्मार्ट कैसे हो हमारी स्मार्ट सिटी विषय पर प्रकाश डाला। मराठी साहित्य समिति की प्रभारी कुमुद लाड, महाराष्ट्र नाट्य मंडल की प्रमुख अभया जोगलेकर, संत ज्ञानेश्वर स्कूल के सह प्रभारी परितोष डोनगांवकर ने वक्ताओं का शाल- श्रीफल, स्मृति चिन्ह से सम्मान किया।