दिव्य महाराष्ट्र मंडल

अंधेरा मंच, बैकड्राप से रोशनी और विट्ठल को साक्षात मंच पर देख मंत्रमुग्ध हुए दर्शक

रायपुर। अंधेरा मंच, बैकड्राप से रोशनी और विट्ठल की मनमोहक आकृति देखकर महाराष्ट्र मंडळ के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में बैठ दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। विट्ठल तो आला-आला का यह पहला दृश्य जितना आकर्षक था, पूरा नाटक उतना ही मनोरंजक। बात हो रही है महाराष्ट्र मंडल में रविवार, 24 सितंबर की रात हुए विट्ठल तो आला-आला नाटक के मंचन की।

महाराष्ट्र मंडळ में शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में दो नाटकों का मंचन किया गया। इनमें पहला डा. वसंत सबनिस लिखित मराठी एकांकिका 'चोर आले पाहिजेत' था। इसमें सुधांशु नाफडे, गौरी क्षीरसागर, भगीरथ कालेले, अभिषेक बक्षी और परितोष डोंनगांवकर ने अपने अभिनय से लाफ्टर के साथ खूब तालियां बटोरी। प्रा. अनिल श्रीराम काळेले निर्देशित इस नाटक की रोचकता इस बात में थी कि केंद्रीय पात्र सुधांशू नाफडे (रामभाऊ) अपने घर के गहनों की बीमा करने के बाद चोरी करवाना चाहता है, लेकिन काफी दिलचस्प संवादों के बीच हास्य परिहास के साथ सफल नहीं हो पाता। 

 

अगला नाटक पु. ल. देशपांडे लिखित सुप्रसिद्ध एकांकिका 'विट्ठल तो आला-आला' मंचित किया गया। 12 पात्रीय इस नाटक में निश्चित ही विट्ठल की भूमिका में भगीरथ काळेले अपनी वेशभूषा, रंगभूषा और संवाद अदायगी से छाए रहे। उनका साथ प्रसन्न निमोणकर (सेठजी), चेतन दंडवते (पंडितजी), प्रिया बक्षी (वकील), सुधाशु नाफडे़ (पशु चिकित्सक), अभिषेक बक्षी (मास्टर), प्रेम उपवंशी (दर्जी), कीर्ति हिशीकर (गायिका), पवन ओगले (अंधा भिखारी) ने बखूबी दिया।

भगवान विट्ठल हर पात्र से काम मांगते या अपना स्वयं का स्थान देकर स्वयं उनकी जगह काम करने का प्रस्ताव देते दिखे। इस प्रस्ताव को सभी ने सौम्यता के अपने-अपने तर्कों से ठुकरा दिया। इस बीच नाटक को एक अलग ही रंग देने के लिए अचानक नवीन देशमुख (फिल्म डायरेक्टर), रविंद्र ठेंगड़ी (म्यूजिक डायरेक्टर) मंच पर आते है और हास परिहास का नया दौर शुरू हो जाता है।  50 मिनट के इस नाटक में निर्देशक प्रा. अनिल श्रीराम काळेले दर्शकों के साथ समाज को सशक्त संदेश देने में सफल रहे।  अपनी निर्देशकीय दक्षता से काळेले ने करीब 75 साल पुराने इस नाटक की सामायिकता को नई ताजगी दी।

दोनों ही नाटकों में कला संयोजन अजय पोतदार, वेशभूषा अपर्णा कालेले  मेकअप वंदना निमोणकर और पाश्व संगीत परितोष डोंनगांवकर  ने दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिति अरूण भावे और वनजा भावे ने दोनों नाटकों के भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए अतिशीघ्र तीन अंकीय नाटक की योजना बनाने का आग्रह किया। महाराष्ट्र मंडळ के अध्यक्ष अजय काळे ने नये भवन में संत ज्ञानेश्वर सभा गृह के सौ. कुमुदिनी वरवंडकर मंच पर सफलता पूर्वक मंचित किए गए दोनों नाटकों के लिए पूरी टीम का अभिवादन किया।