दिव्य महाराष्ट्र मंडल

शिवाजी महाराज की महाआरती.... शिवाजी ने आदिलशाह की कैद से छुड़ाया पिता को: काले

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में मंगलवार की देर शाम छत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती की गई। प्रति माह 19 तारीख को पदाधिकारियों व सदस्यों की उपस्थिति में यह विशेष आयोजन किया जाता है। 
मंडल अध्यक्ष अजय काले ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के कुशल नेतृत्व एवं रणनीति का महत्वपूर्ण उदाहरण तो यह है कि उन्होंने आदिलशाह की कैद से कुशलतापूर्वक अपने पिता शाहजी महाराज को निकाला। साथ ही आदिलशाह के दो किलों पर भी कब्जा किया। 
अजय काले ने अपने संबोधन में कहा कि आदिलशाह ने बड़ी तैयारी और रणनीति के तहत शिवाजी महाराज के पिता शाहजी को बंदी बना लिया था। दरअसल उनकी योजना छत्रपति शिवाजी को धर दबोचने की थी, लेकिन शिवाजी ने उनके षड्यंत्र को पहले ही भांप लिया था। जैसे ही उन्हें पता चला कि शाहजी महाराज आदिलशाह के षडयंत्र में फंसकर उनके कब्जे में हैं, तो उन्होंने अपने गुप्तचरों को आदिलशाह के साम्राज्य के चप्पे- चप्पे में फैला दिया। बहुत कम समय में उन्हें उस जेल का पता चल गया, जहां शाहजी महाराज को रखा गया था। 
काले ने कहा कि शिवाजी महाराज ने कुटिल रणनीतिक कौशल के साथ न केवल अपने पिता शाहजी को जेल से बाहर निकाल लिया, बल्कि आदिलशाह के पुरंदर और जावली के किलों पर कब्जा भी कर लिया। काले ने कहा कि शिवाजी महाराज सभी धर्म का सम्मान करते थे इसीलिए उन्हें हिंदू सम्राट के रूप में भी जाना जाता है।
मंगलवार को देर शाम हुई शिवाजी महाराज की महाआरती के मुख्य अतिथि, मंडल के आजीवन सभासद विद्यासागर राजिमवाले थे। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज कुशाग्र बुद्धि, कुशल शासक, सफल रणनीतिकार और वीर योद्धा थे। शिवाजी महाराज में मुगलों का साहसपूर्वक सामना करने और कम संख्या बल के बावजूद उनको परास्त करने का सामर्थ्य था। शिवाजी को उनकी वीरता, रणनीति और नेतृत्व के कारण ही छत्रपति की उपाधि मिली थी। 
महाआरती में उपाध्यक्ष श्याम सुंदर खंगन, सचिन चेतन दंडवते, संत ज्ञानेश्वर स्कूल के सह प्रभारी परितोष  डोनगांवकर, महाराष्ट्र नाट्य मंडल के निर्देशक अनिल कालेले, सचेतक रविंद्र  ठेंगड़ी, अतुल गिर्हे समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।