दिव्य महाराष्ट्र मंडल

450 किमी पैदल चलकर आईं पहुंचे थे अयोध्या... बाबा को 15 दिन रहना पड़ा था जेल में

 

किरण अनवेकर, रायपुर

रायपुर। 1992 में मेरे आई-बाबा ने कारसेवा की। वहां से लौटने के बाद से आई और बाबा हमेशा अपनी उन यादों को हमें सुनाया करते थे। आई बताती थी कि कैसे उन्होंने झांसी से अयोध्या तक 450 किमी की पैदल यात्रा की। वहीं झांसी में गिरफ्तारी के बाद करीब 15 दिन बाबा मिर्जापुर जेल में रहे। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। 
 
मेरी आई सौ वसुधा सिध्दभट्टी और बाबा वसंत त्रयंबक सिध्दभट्टी 1992 में कार सेवा के लिए भोपाल से गए थे। उस वक्त हम लोग भोपाल में रहा करते थे। भोपाल से वे बस से निकले। झांसी पहुंचने के पहले उन लोगों क पता चला कि यहां कार सेवकों की गिरफ्तारी हो रही है। पुलिस ने बाबा को गिरफ्तार कर लिया और कार सेवकों के जत्थे के साथ आई आगे निकल गई। बाबा को अस्थाई मिर्जापुर जेल में रखा गया। उनके साथ राजमाता सिंघिंया और शिवराज सिंह चौहान भी मिर्जापुर जेल में थे। वे करीब 15 दिन वहां रहे। 15 दिन बाद उन्हें रिहा कर मुगलसराय स्टेशन में छोड़ा गया। वे भोपाल लौट आए। 
 
वहीं दूसरे ओर बाबा से अलग होने के बाद आई कारसेवकों के जत्थे के साथ अयोध्या के लिए पैदल ही निकल पड़ी। आई ने शिला लेकर करीब 450 किमी की यात्रा पैदल तय की। वहां से कार सेवा करने के बाद वह सकुशल भोपाल लौट आई। हालांकि इनते लंबे पैदल सफर का असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा था। वहां से लौटने के बाद वे काफी बीमार हो गई थी। 
 
आज बाबा की उम्र 95 वर्ष हो रही है। ऐसे में बाबा को जब इस बात का पता चला कि अयोध्या में  22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। वे काफी खुश है।