विश्व जल संरक्षण दिवस पर बोले डा. उरकुरकर.... जितना चाहिए था, ईश्वर ने उतना ही दिया
रायपुर। हम जब छोटे थे तो किताबों में पढ़ते थे कि पृथ्वी के 73 फीसद हिस्से में पानी है, उसमें भी 70 फीसद में खारा यानी समुंद्र का पानी और 3 फीसद मीठा यानी पीने योग्य पानी है। तब लगता था कि ईश्वर ने इतना कम पानी पीने योग्य क्यों दिया। आगे बड़ी कक्षाओं में पहुंचे तक समझ में आया कि हमें जो आक्सीजन मिलता है, उसमें इन समुद्रों में बनने वाली काई की बड़ी भूमिका होती है। अगर यह नहीं होता तो हमें पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिलता है। ईश्वर ने हमें उतना ही जल पीने योग्य दिया जितने की हमें आवश्यकता है। इसलिए आज हमें इस जल का संरक्षण आवश्यक है। उक्त बातें डा. जेएस उरकुरकर ने महाराष्ट्र मंडळ द्वारा आयोजित खारुन की आरती और पूजन अवसर पर कहीं।
महाराष्ट्र मंडळ रायपुर द्वारा शुक्रवार को सुबह महादेव घाट पर विश्व जल संरक्षण दिवस मनाया गया। सुबह 8 बजे महादेव घाट स्थित खारून नदी की पूजा- अर्चना कर आरती की जाएगी। कार्यक्रम की संयोजक, पर्यावरण और खेलकूद समिति की मेंटर गीता दलाल ने बताया कि मंडल के वरिष्ठ सदस्य और कार्यकारिणी मौके पर उपस्थित थे।
गीता ने बताया कि सुबह 8 बजे खारुन की आरती और पूजा अर्चना के बाद मंडल के वरिष्ठ डा. जेएस उरकुरकर ने जल संरक्षण को लेकर सारगर्भित विचार रखें। उन्होंने कहा कि भविष्य में जल संरक्षण का प्लान शहर के गार्डन में बनाया जाएगा। गार्डन के बीच में तालाब की खुदाई कर पार में पाथवे बनाया जाएगा। वहीं मंडल के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ सदस्य श्याम सुंदर खंगन ने भी जल संरक्षण को लेकर टिप्स दिए।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी सदस्यों ने शत-प्रतिशत मतदान को लेकर स्थानीय लोगों के साथ शपथ ली। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक गीता दलाल, मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले, मंडल उपाध्यक्ष श्याम सुंदर खंगन, श्याम दलाल, अपर्णा देशमुख, भारती पलसोदकर, अंकिता किरवई, रेखा उरकुरकर, अभय भागवतकर, वैभव बर्वे, कुणाल दत्त मिश्रा प्रमुख रुप से उपस्थित थे।