दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्ट्र मंडल ने 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' को बड़े पर्दे पर जीया

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के लगभग सौ आजीवन सभासदों ने मंगलवार की शाम 36 सिटी सेंटर माॅल के आइनाॅक्स मल्टीप्लेक्स में स्वातंत्र्य वीर सावरकर फिल्म देखी। फिल्म को लेकर पहले से बनाया गया माहौल बड़े पर्दे पर साकार होते दिखा। इस फिल्म को देखना अपने आप में अद्भुत अनुभव दे गया। इसे देखने के बाद सभी सभासदों की भावुक प्रतिक्रियाएं मिलीं। 

अध्यक्ष अजय काले ने कहा कि फिल्म स्वातंत्र्य वीर सावरकर देखकर क्या कहूं। शब्द सीमित हो गए हैं। न तो मुझे रणदीप हुड्डा दिखाई दे रहे हैं, न पर्दे पर उनकी पत्नी की भूमिका में अंकिता लोखंडे जैन और न कोई अन्य कलाकार। न ही कोई स्क्रिप्ट। ऐसा लग रहा है जैसे स्वतंत्रता संग्राम में खुद भाग ले रहा हूं। फिल्म मुझे 1910 से 1966 के रिज्यूम में लेकर चली गई। ऐसा लग रहा है मानो भावनात्मक रूप से मैं टाइम ट्रेवल कर रहा हूं।सचिव चेतन गोविंद दंडवते कहते हैं कि पूरे जीवन में ऐसी मूवी नहीं देखी, जिसमें मेरा अपना अस्तित्व विलीन हो गया हो। पूरे समय सावरकर मेरे अंदर समाए रहे। मैं वह सब अनुभव कर रहा था, जो शायद उस समय के लोगों ने अनुभव किया होगा। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की परतों को खोलती हुई यह एक बेहतरीन फिल्म है, जिसे कम से कम दो-तीन बार जरूर देखना चाहिए। उन्होंने अपील की कि 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' को हर एक सिने दर्शक हाॅल में जाकर अवश्य देखें और स्व. विनायक दामोदर सावरकर को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करे।उपाध्यक्ष श्याम सुंदर खंगन के अनुसार फिल्म हमें स्वतंत्रता संग्राम के उन तथ्यों और घटनाओं की प्रमाणिक जानकारी देती है, जिनके बारे में या तो हम भ्रमित थे या अंजान। डॉक्यूमेंट्री फॉर्म में बनी इस फिल्म को किसी अलग शैली अथवा अधिक रोचक स्क्रिप्ट के साथ प्रस्तुत किया जाता, तो संभवतः हर आयु वर्ग के लोग इससे संजीदगी के साथ जुड़ पाते। फिर भी स्वातंत्र्य वीर सावरकर को बड़े पर्दे पर देखना किसी सपना के साकार होने जैसा है।