महाराष्ट्र मंडल में महिलाओं ने मनाई अहिल्याबाई होल्कर जयंती... कहा- 'आज भी प्रासंगिक हैं अहिल्याबाई'
2024-06-01 09:39 AM
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रायपुर। राजकीय कोष का बेहतरीन उपयोग कैसे किया जाता है, यह कोई देवी अहिल्याबाई से सीख सकता है। उनकी नियोजन क्षमता, दूरदृष्टि, बहादुरी रोजगारपरक सोच, न्यायप्रियता, हिंदू संस्कृति को बढ़ाने और संरक्षित करने की जिद जैसी कई विशेषताओं के कारण हमारे समाज में आज भी अहिल्याबाई होल्कर प्रासंगिक हैं। उक्ताशय के विचार सुमिता रायजादा ने महाराष्ट्र मंडल में व्यक्त किए।
अहिल्याबाई की 300वीं जयंती महाराष्ट्र मंडल के सभी 15 केंद्रों की महिलाओं के मनाई। इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में अंजलि खेर ने कहा कि जब पेशवा ने पूरे मालवा को अपने साम्राज्य में मिलाने या युद्ध करने की धमकी भरी सूचना भिजवाई। तो अहिल्याबाई ने अपने दूत के माध्यम से बड़ा चातुर्यतापूर्ण जवाब भिजवाया कि वे अपनी सेना की नेतृत्वकर्ता नारी हैं और उनकी सेना में हजारों नारी सैनिक भी हैं। अगर वे हार गईं, तो भी उनका ही यश बढ़ेगा, जीत गई तो भी प्रतिष्ठा बढ़ेगी, लेकिन दोनों ही परिस्थितियों में आपके सम्मान का क्या होगा। हमसे जीत कर भी आपकी प्रतिष्ठा तो नहीं बढ़ेगी। पेशवा को अहिल्याबाई का संकेत समझ में आ गया और उन्होंने आक्रमण का विचार को त्याग दिया।

इस मौके पर स्वाति मोड़क ने अहिल्याबाई पर लिखी गई प्रभादेवी नांदेड़कर की कविता सुनाई। अनुभा जाउलकर, अपर्णा मोघे, वैभवी हिशीकर ने अहिल्याबाई की समूची जीवनी पर विभिन्न घटनाक्रमों को समेटते हुए प्रकाश डाला। सारिका गेडेकर ने अहिल्याबाई के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख कर उनके व्यक्तित्व की विशेषताएं बताईं। सुरभि गनोदवाले ने बताया की 25 अगस्त 1995 को देवी अहिल्याबाई होल्कर की स्मृति में डाक टिकट जारी किया गया और उसके बाद से इंदौर में व्यापक पैमाने पर अहिल्या उत्सव मनाया जाता है।
गीता दलाल ने बताया कि काशी में हाल ही में अहिल्याबाई की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है और उस पर उनसे संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी गई हैं। कार्यक्रम का संचालन महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने किया। आभार प्रदर्शन रश्मि गोवर्धन और नमिता शेष ने किया। कार्यक्रम में मंडल के कार्यकारिणी सदस्यों के साथ सभी 15 केंद्रों की पदाधिकारी एवं महिलाएं उपस्थित थीं।