दिव्य महाराष्ट्र मंडल

सलाम उन शहीदों को जो खो गए... वतन को जगाकर खुद सो गए

रायपुर। सलाम उन शहीदों को जो खो गए... वतन को जगाकर खुद सो गए... कविता के पाठ ने संत ज्ञानेश्वर स्कूल परिसर को पूरी तरह देशप्रेम में डूबो दिया। तालियों की गड़गड़ाहट और भारतमाता की जय के बीच स्कूल की छात्रा आस्था ने मनमोहक कविता पाठ किया। इससे पूर्व महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद और भारतीय स्टेट बैंक से रिटायर्ड डिप्टी मैनेजर उदय चिमोटे ने ध्वाजारोहण किया।

बच्चों को संबोधित करते हुए उदय चिमोटे ने कहा कि आज हमारी नवीन शिक्षा प्रणाली में इतिहास के ऐसे कई पहलुओं को रेखांकित किया जा रहा है जिसका उल्लेख पूर्व में नहीं किया गया था। हम महात्मा गांधी, नेहरू, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह के अलावा कई ऐसे नेताओं की आज जन्मतिथि और पुण्यतिथि मना रहे हैं जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अपने प्राणों की आहूति दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्कूल प्रभारी परितोष डोनगाँवकर ने अपने उद्बोधन मे बताया कि सन् 1993 में अविभाजित मध्य प्रदेश के रायगढ़ (वर्तमान में छत्तीसगढ़) में नवीन जिंदल अपने स्टील प्लांट में तिरंगा फहराने जा रहे थे, जिसमे एक अधिकारी ने उन्हे रोक दिया और बताया की भारतीय नागरिक को अपने देश का ध्वज फहराने की अनुमति नहीं है।केवल शासकीय कार्यालयों पर ही तिरंगा फहराया जा सकता है।

इस पर जिंदल ने ठान लिया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार लेकर रहेंगे। इसके लिए वे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गये और अंततः लगभग 1 दशक की लड़ाई के बाद सन 2004 सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिससे हर भारतीय को भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा गरिमा और सम्मान के साथ फहराने की अनुमति दी।

इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यअतिथि द्वारा ध्वजारोहण के साथ किया गया। वहीं प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने अपने स्वागत भाषण में स्कूल की उपलब्धि पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर बच्चों ने देशभक्ति से भरे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। वहीं 13 अगस्त को दीनदयाल उपाध्याय आडिटोरियम में हुए ड्राइंग स्पर्धा में तीसरा स्थान आने वाले कक्षा 5वीं के लोकेश कोठारी और गुरु सम्मान मिलने पर शिक्षिका सुदेवी विश्वास को सम्मानित किया गया।