‘आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको....’ की प्रस्तुति ने महाराष्ट्र मंडल को बनाया वृंदावन
2024-09-14 01:34 PM
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- गजलों और भजन की प्रस्तुति ने बांधा समां.
- महाराष्ट्र मंडळ में सजीं सुर ताल की महफिल

रायपुर। ‘आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको....’, ‘हरि बिन जीवन में क्या रखा...’ राधा रमण हरे-हरे और राधा किशोरी दया करो... की गूंज से महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में वृंदावन धाम की अनुभूति होने लगी। मीरा के भजन शुरू होते ही हाल में बैठक श्रोताओं ने कृष्ण की भक्ति में डुबकी लगाई। महाराष्ट्र मंडल में शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव के सातवें दिन कमल ताई शेष स्मृति सुगम संगीत स्पर्धा में यह दृश्य देखने को मिला। यहां राजधानी रायपुर के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के साथ दिव्यांग महाविद्यालय माना और इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के दिव्यांग छात्रों सहित करीब 40 प्रतिभागियों ने गजल और भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से संगीतप्रेमी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम की आयोजक रंजन मोडक ने बताया कि सुगम संगीत स्पर्धा में निर्णायक भूमिका रमेश पालकर और धर्मेन्द्र सिंहदेव ने बखूबी निभाई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, मंडल के वरिष्ठ आजीवन सभासद विनोद शेष रहे, जिन्होंने अपनी मां की स्मृति में यह संगीतमय प्रतियोगिता करवाई है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडळ अध्यक्ष अजय काळे ने की। वहीं मंडळ के सचिव चेतन दंडवते भी विशेष रुप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। अतिथियों और निर्णायकों का स्वागत शाल और श्रीफल भेंटकर किया गया।

कला एवं सांस्कृतिक समिति की प्रभारी भारती पलसोदकर ने बताया कि प्रतियोगिता में दिव्यांग महाविद्यालय माना, संगीत विवि खैरागढ़, बालाजी विद्या मंदिर, कृष्णा पब्लिक स्कूल सरोना, ग्लावदास चंद्रप्रभा चेरिटेबल ट्रस्ट, संत ज्ञानेश्वर स्कूल, कमलादेवी संगीत महाविद्यालय सहित कई स्कूलों व कालेजों के बच्चों व युवाओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान चैतन्य जोगळेकर, द्वितीय जिया रानी ध्रुव और तृतीय स्थान उत्कर्ष दुबे ने प्राप्त किया।

तीनों विजयी प्रतिभागियों को क्रमशः 1000, 750 और 500 रुपये की नकद पुरस्कार राशि के साथ शील्ड और प्रमाणपत्र दिया गया। कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति समिति के सुमित मोडक, अंकिता किरवई, स्मिता टेंबे, धनश्री पेडसे, अस्मिता कुसरे, अक्षता पंडित, सृष्टि दंडवते, यशस्वी दंडवते और मनीषा मुकादम का विशेष योगदान रहा।

दिव्यांग बच्चियों की प्रस्तुति ने मोहा मन
कार्यक्रम की शुरूआत स्पर्धा में द्वितीय आई नेत्रहीन जिया रानी ध्रुव ने मीराबाई के भजनों के साथ की। ‘आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको…’ की प्रस्तुति दी सुर और ताल का काम्बीनेशन देख दर्शकदीर्घा में बैठे लोगों ने खूब तालियां बजाई। वहीं टोपलाल साहू ने मिर्जा गालिब का गजल, करीना खुटे ने सूरदास का भजन ‘निसदिन बरसत नैन हमारे...’ और कविता कुम्हार ने गोपाल दास नीरज की गजल ‘अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए...’ प्रस्तुत किया।

भजन के साथ गजल ने किया मंत्र मुग्ध
कमल ताई शेष सुगम संगीत स्पर्धा में इस बार इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के छात्र भी शामिल हुए। वसुंधरा गायकवाड़ ने कबीर दास का भजन ‘मन लागो मेरो यार फकीरी में...’, अंजलि बड़ा ने ‘राधे किशोरी दया करो...’, पुष्पाजंलि और गीताजंलि साहू ने गजल की प्रस्तुति दी। अदिति पांडे ने शिव अराधना, कावेरी व्यास ने कबीर की कृति पेश की।
