मराठी को मिला अभिजात भाषा का दर्जा, महाराष्ट्र मंडल में हर्ष
2024-10-04 01:18 PM
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रायपुर। शास्त्रीय भाषाएं भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की संरक्षक के रूप में काम करती हैं और प्रत्येक समुदाय के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सार को प्रस्तुत करती हैं। वर्ष 2013 में महाराष्ट्र सरकार ने मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा देने के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। अब केंद्र ने इसे मंजूरी दे दी। अब देश में कुल 11 अभिजात भाषाएं होगी। इनमें हैं- तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड, मलयालम और उड़िया को पहले ही यह दर्जा मिल चुका है। अब मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को भी यह दर्जा मिल गया है।
मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने पर महाराष्ट्र मंडल के पदाधिकारियों ने हर्ष व्यक्त किया है। मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल लंबे समय से मराठी संस्कृति और परंपराओं को संजोए रखने के लिए कार्य कर रहा है। केंद्र के इस फैसले से मराठी के प्रति लोगों की रुचि बढ़ेगी। अभिजात भाषाएं भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की संरक्षक के रूप में काम करती हैं। साथ ही प्रत्येक समुदाय के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सार को प्रस्तुत करती हैं। भाषाओं को अभिजात भाषा के रूप में शामिल करने से खासकर शैक्षणिक और शोध क्षेत्रों में रोजगार के अहम अवसर पैदा होंगे।
महाराष्ट्र नाट्य मंडल के निर्देशक अनिल श्रीराम कालेले ने कहा कि मराठी एक वैज्ञानिक भाषा है, इसमें आपको ग्रामर, टेंस समाहित मिलेंगे। क्षेत्रानुसार खंड- खंड में विभाजित मराठी भाषा को एक सूत्र में पिरोया गया है। अब विदर्भ से लेकर कोंकण तक हम एक भी भाषा का अध्ययन करेंगे। इसमें सभी के ग्रामर एक होंगे। संस्कृति को लेकर एकरूपता नजर आएगी। इन भाषाओं के प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण से संग्रह, अनुवाद, प्रकाशन और डिजिटल मीडिया में रोजगार पैदा होंगे।
महाराष्ट्र मंडल की आजीवन सभासद और मराठी स्पीकिंग क्लास की प्रभारी पद्मजा लाड ने कहा कि मराठी भाषा भारतीय विरासत का आधार स्तंभ है। अभिजात भाषा का दर्जा मिलने से कई लोग इस भाषा को सीखने के लिए प्रेरित होंगे। मराठी को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर दो पुरस्कार दिए जाते है। वहीं जल्द ही सेंटर फार एक्सीलेंस स्टडी और आध्यात्म केंद्र की स्थापना की जाएगी। इन दोनों के प्रारंभ होने के बाद मराठी सीखने वालों की संख्या बढ़ जाएगी। आज हमारी नई पीढ़ी कहीं न कहीं मराठी सीखने में पीछे रह गई है और कुछ अनिच्छुक भी लगती है। केंद्र की इस पहल के बाद मराठी की ख्याति देश ही नहीं विदेशी में भी नजर आएगी।