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वरूथिनी एकादशी 13 अप्रैल को.... जानें शुभ मुहूर्त और पारण का सटीक समय

डेस्क। हिंदू धर्म में वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे वरूथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष यह एकादशी 13 अप्रैल, 2026 को है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के ‘वराह’ अवतार की पूजा की जाती है। ज्योतिष गणनाओं के आधार पर इस बार तिथि का विस्तार और नक्षत्रों का संयोग व्रत के पुण्य फल को और अधिक बढ़ा रहा है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 13 अप्रैल को रात 1 बजकर 16 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 14 अप्रैल को रात 1 बजकर 8 मिनट पर होगा। उदय तिथि की गणना के आधार पर व्रत 13 अप्रैल, सोमवार को ही मान्य होगा। व्रत का पारण 14 अप्रैल को सूर्योदय के पश्चात किया जाएगा।

पूजा और अनुष्ठान के लिए दिन के महत्वपूर्ण मुहूर्त निम्नलिखित हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:28 से 05:13 तक (साधना और स्नान के लिए सर्वोत्तम)

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:31 तक (विशेष कार्यों की सिद्धि के लिए)

गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:44 से 07:07 तक

निशिता मुहूर्त: रात 11:59 से 12:44 तक (रात्रि जागरण और दीपदान के लिए)

पंचांग विशेषज्ञों का मत श्रद्धालुओं के लिए जरूरी नियम और प्रभाव

वरूथिनी एकादशी पर अन्न दान और जल दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए हरिद्वार, प्रयागराज और वाराणसी जैसे तीर्थों पर जुटते हैं। स्थानीय प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए घाटों पर सुरक्षा और सफाई के पुख्ता इंतजाम किए हैं। व्रत रखने वाले भक्तों को शहद, मसूर की दाल और चने के साग का सेवन वर्जित बताया गया है।

ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन किए गए दान का फल कन्यादान के फल के समान मिलता है। यदि आप घर पर ही पूजा कर रहे हैं, तो विजय मुहूर्त में पूजा करना विशेष फलदायी रहेगा। पारण के दिन यानी 14 अप्रैल को ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देने के बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करें।