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पुष्य नक्षत्र 11 अगस्त को... अपने बच्चों का कराए स्वर्णप्राशन संस्कारः डॉ. पपीता ब्राह्मणे

रायपुर। आयुर्वेद में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और बुद्धि बढ़ाने के लिए पुष्य नक्षत्र के दिन स्वर्णप्राशन देना सबसे शुभ और असरदार माना गया है, क्योंकि पुष्य को 27 नक्षत्रों में 'पोषणकर्ता' और सभी कार्यों के लिए सबसे पवित्र व ऊर्जावान नक्षत्र कहा गया है। आगामी 11 अगस्त 2026 (मंगलवार) को पुष्य नक्षत्र है। आप अपने जन्म से लेकर 16 साल तक के बच्चों का स्वर्णप्राशन संस्कार अवश्य कराएं।  महाराष्ट्र मंडल के स्वास्थ्य समिति की सदस्य डॉ. पपीता ब्राह्मणे ने इस संदर्भ में अपने सदस्यों से अनुरोध किया कि वे अपने बच्चों का स्वर्णप्राशन अवश्य कराएं।

डॉ. पपीता ब्राह्मणे ने कहा कि इम्यूनिटी पावर और माइंड डेवलपमेंट के लिए स्वर्णप्राशन संस्कार कराया जाता है।   सुवर्णप्राशन आयुर्वेद की एक पारंपरिक विधि है, जिसका उल्लेख कश्यप संहिता में मिलता है। इसमें शुद्ध एवं संस्कारित स्वर्ण को घृत (गाय का घी), मधु (शहद) तथा कुछ मेध्य (बुद्धिवर्धक) औषधियों जैसे ब्राह्मी, शंखपुष्पी, वचा, गुडूची के साथ निर्धारित मात्रा में बच्चों को दिया जाता है।

डॉ. पपीता ब्राह्मणे ने कहा कि यह जन्म से लेकर 16 वर्ष तक के बच्चों को दिया जा सकता है। सबसे उत्तम समय पुष्य नक्षत्र माना जाता है, जो लगभग हर 27–28 दिन में एक बार आता है। आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह से अन्य दिनों में भी दिया जा सकता है। बह खाली पेट या हल्के भोजन से पहले देना अधिक उपयुक्त माना जाता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसके साथ स्मरण शक्ति एवं एकाग्रता, बुद्धि एवं मानसिक विकास में सहयोग, पाचन एवं भूख में सुधार, शारीरिक वृद्धि एवं विकास में सहायक, बार-बार होने वाले सर्दी-जुकाम और संक्रमण की आवृत्ति कम करने में मदद, ऊर्जा एवं सामान्य स्वास्थ्य को समर्थन के साथ पाचनशक्ति को मजबूत बनाने मे मदद करा है।