श्रीनगर मौसम विज्ञान केंद्र ने अपने अस्तित्व के 100 वर्ष से अधिक पूर्ण किए : इसे शताब्दी केंद्र का दर्जा दिया गया
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आईएमडी के वैश्विक प्रभाव का उल्लेख किया
पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने मोदी 3.0 द्वारा पहले 100 दिनों में शुरू किए गए 2,000 करोड़ रुपये के ‘मिशन मौसम’ पर प्रकाश डाला; इससे भारत मौसम विज्ञान में वैश्विक प्रमुख के तौर पर स्थापित होगा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आईएमडी ने अपने बुनियादी ढांचे का काफी विस्तार किया; अब एक दशक पहले की तुलना में स्वचालित मौसम स्टेशनों (एडब्ल्यूएस) की संख्या दोगुनी
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने जम्मू के लिए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) की घोषणा की
नई दिल्ली | केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक ऐतिहासिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जम्मू में एक क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना की घोषणा की। यह पहल जम्मू और कश्मीर में मौसम संबंधी सेवाओं को मजबूत करने, क्षेत्र में आपदा तैयारी और जलवायु अनुकूलन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने भारत की वैज्ञानिक प्रगति में आईएमडी के अद्वितीय योगदान और मौसम संबंधी सेवाओं में वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त अग्रणी के रूप में इसके परिवर्तन की सराहना की। उन्होंने कहा कि 1875 में अपनी छोटी सी शुरुआत से, आईएमडी एक गतिशील संस्थान के रूप में विकसित होने के साथ-साथ महत्वपूर्ण मौसम डेटा प्रदान करता है और कृषि, आपदा प्रबंधन, विमानन एवं रक्षा जैसे क्षेत्रों को सशक्त बनाता है। इसके पूर्वानुमानों की विश्वसनीयता और सटीकता नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई है, जिससे नागरिक सूचित निर्णय लेने में सक्षम हुए हैं।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा शताब्दी केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त श्रीनगर मौसम विज्ञान केंद्र के ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि जम्मू में बनने वाला क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र इसकी सफलता को दोहराएगा। उन्होंने कहा कि यह नया केंद्र जम्मू क्षेत्र की अनूठी भौगोलिक और जलवायु चुनौतियों का समाधान करेगा, जिससे देश भर में सटीक और समय पर मौसम पूर्वानुमान देने के आईएमडी के मिशन में योगदान मिलेगा।
आईएमडी के विकास पर विचार करते हुए, डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि 2014 के बाद से तकनीकी प्रगति ने भारत की मौसम संबंधी क्षमताओं में किस तरह क्रांति ला दी है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक अंतरिक्ष, भूमि और समुद्री प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के साथ, आईएमडी अब 40 प्रतिशत से अधिक बेहतर सटीकता के साथ पूर्वानुमान प्रदान करता है। यह तकनीकी उपलब्धि चक्रवातों, अचानक बाढ़, हिमस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों को कम करने में अमूल्य सिद्ध हुई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, आईएमडी ने अपने बुनियादी ढांचे का काफी विस्तार किया है। जम्मू और कश्मीर में अब एक दशक पहले की तुलना में स्वचालित मौसम स्टेशनों (एडब्ल्यूएस) की संख्या दोगुनी हो गई है, साथ ही जम्मू, श्रीनगर, मनिहाल और लेह में उन्नत एक्स-बैंड रडार की स्थापना की गई है। अमरनाथ यात्रा और वैष्णो देवी तीर्थयात्राओं सहित महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए सटीक मौसम पूर्वानुमान सुनिश्चित करने में ये विकास महत्वपूर्ण रहे हैं।
मंत्री महोदय ने सरकार के महत्वाकांक्षी मिशन मौसम का उल्लेख किया, यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल मोदी 3.0 के पहले 100 दिनों के हिस्से के रूप में शुरू की गई 2,000 करोड़ रुपये की पहल है। 2024 से 2026 तक चलने वाले इस मिशन का उद्देश्य भारत को "मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति स्मार्ट" बनाना है। बेहतर पूर्वानुमान उपकरणों और बढ़ी हुई पहुंच के साथ, मिशन नागरिकों और हितधारकों को कार्रवाई योग्य जलवायु अंतर्दृष्टि से लैस करने पर ध्यान केंद्रित करता है।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने जोर देकर कहा कि यह मिशन जलवायु कार्रवाई में भारत के बढ़ते नेतृत्व को रेखांकित करता है और अन्य देशों के लिए अनुकरणीय मानक स्थापित करता है। हम 2047 तक भारत को मौसम संबंधी सेवाओं और आपदा तैयारियों के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में देखते हैं।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने निष्कर्ष देते हुए कहा कि जैसा कि हम इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, हमें एक ऐसे भविष्य की दिशा में कार्य करना जारी रखना चाहिए, जहां भारत मौसम विज्ञान संबंधी विशेषज्ञता में दुनिया का नेतृत्व करे और सभी के लिए सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करे।
जम्मू के लिए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की घोषणा को इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और विश्वसनीय मौसम सेवाओं के साथ नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।