केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने पूर्वोत्तर में खनिज और कोयला क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार के पूर्ण सहयोग की पुष्टि की
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने गुवाहाटी में आयोजित पूर्वोत्तर खनन मंत्रियों के दूसरे सम्मेलन में खनिज और कोयला समृद्ध पूर्वोत्तर राज्यों को भारत सरकार के पूर्ण सहयोग की पुष्टि की है। केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम के दूसरे दिन उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए खनन क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाने, परियोजना अनुमोदन में तेजी लाने और क्षेत्र में टिकाऊ खनन कार्य प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर का विकास विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का केन्द्र बिन्दु है, जहां पूर्वोत्तर के आठ राज्यों - असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा तथा सिक्किम - को अष्टलक्ष्मी के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि रोजगार सृजन, निवेश आकर्षित करने तथा खनिज और कोयला क्षेत्र के विकास के माध्यम से समावेशी आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिए केंद्र व राज्य सरकार के बीच समन्वय बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
सम्मेलन के दौरान, सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधियों ने खनन और कोयला क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के लिए अपने रोडमैप प्रस्तुत किए। मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के मंत्रियों ने नागालैंड के मुख्यमंत्री के सलाहकार के साथ मिलकर राज्य-विशिष्ट रणनीतियों, उपलब्धियों तथा भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने ब्लॉक नीलामी, महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, कोयला खदानों के पुनरुद्धार, लघु खनिजों के विकास और टिकाऊ खनन मॉडल को अपनाने में हुई प्रगति पर चर्चा की।
चर्चाओं में पर्यावरण सुरक्षा उपायों को आर्थिक विकास के साथ संतुलित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाया गया। राज्यों ने क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने और अपनी पूरी संसाधन क्षमता का उपयोग करने के लिए अधिक केंद्रीय सहायता की भी मांग की है।