गंगा घाट पर मुंडन संस्कार बना मातम, चार जिंदगियां लापता
2026-05-04 09:20 AM
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बलिया| बलिया के शिवरामपुर गंगा घाट पर रविवार की सुबह जहां एक परिवार मुंडन संस्कार की खुशियां मनाने पहुंचा था, वहीं कुछ ही पलों में वह खुशी चीख-पुकार और मातम में बदल गई। स्नान के दौरान अचानक गहरे पानी में जाने से चार किशोर-किशोरियां गंगा में समा गए, जिससे पूरे घाट पर अफरा-तफरी मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
मुंडन संस्कार के बीच घटी अनहोनी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फेफना थाना क्षेत्र के कल्याणीपुर निवासी वशिष्ठ चौहान का परिवार मुंडन संस्कार के लिए घाट पर पहुंचा था। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान माहौल सामान्य और उत्सवपूर्ण था। इसी बीच कुछ किशोरियां गंगा में स्नान करने लगीं, लेकिन अचानक वे गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं। देखते ही देखते स्थिति भयावह हो गई।
बचाने की कोशिश में बढ़ा हादसा
किशोरियों को डूबता देख आसपास मौजूद युवक तुरंत नदी में कूद पड़े। उनका मकसद उन्हें बचाना था, लेकिन यह कोशिश भी भारी पड़ गई। तेज धारा और गहराई के कारण दो युवक भी पानी में समा गए। इस तरह बचाव का प्रयास करते-करते हादसा और बड़ा हो गया।
चार को बचाया गया, चार अब भी लापता
स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए बचाव अभियान शुरू किया और डूब रही चार किशोरियों में से दो को किसी तरह सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन बाकी चार लोग लापता हो गए। डूबने वालों में हर्षिता चौहान (17) पुत्री अजीत चौहान, नंदिता चौहान (12) पुत्री अजीत चौहान निवासी रामपुर भोज थाना गड़वार, अरुण चौहान (20) पुत्र मोहन चौहान निवासी कल्याणीपुर थाना फेफना तथा अर्जुन चौहान (19) पुत्र मुरली चौहान निवासी खिलाड़ी महेशपुर, गाजीपुर शामिल हैं।
घंटों चला सर्च ऑपरेशन, फिर भी नहीं मिला सुराग
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय नाविकों की मदद से खोजबीन शुरू कराई गई। करीब चार घंटे तक लगातार प्रयास किए गए, लेकिन लापता लोगों का कोई सुराग नहीं मिल सका। इसके बाद राहत और बचाव कार्य को तेज करने के लिए एसडीआरएफ टीम को बुलाया गया, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही लापता लोगों का पता चल सकेगा।
प्रशासन की कार्रवाई और इलाके में पसरा मातम
क्षेत्राधिकारी उस्मान ने बताया कि सभी लापता लोगों की तलाश जारी है और बचाव कार्य में किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ी जा रही है। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे घाट पर सन्नाटा और मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि स्थानीय लोग भी इस घटना से गहरे सदमे में हैं।
यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि गंगा घाटों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं होते, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।