धान से फूलों तक: आनंदराम सिदार की मेहनत ने बदली किस्मत, 22 हजार से 3 लाख तक का सफर
2026-05-04 10:33 AM
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रायपुर| छत्तीसगढ़ के खेतों में अब सिर्फ धान की हरियाली ही नहीं, बल्कि रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू भी नई उम्मीदें जगा रही है। पारंपरिक खेती की सीमाओं से बाहर निकलकर किसान अब आधुनिक और लाभकारी विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक कहानी रायगढ़ जिले के कोड़केल गांव के किसान आनंदराम सिदार की है, जिन्होंने धान की खेती छोड़कर गेंदा उत्पादन अपनाया और अपनी तकदीर ही बदल डाली।
परंपरागत खेती से नवाचार की ओर कदम
रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के छोटे से गांव कोड़केल में रहने वाले आनंदराम सिदार पहले पारंपरिक धान की खेती करते थे। यह खेती उनके लिए केवल गुजारे का जरिया थी, जिसमें मेहनत ज्यादा और मुनाफा बेहद सीमित था। लेकिन समय के साथ उन्होंने यह समझा कि यदि आय बढ़ानी है तो खेती के तरीके में बदलाव जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने उद्यानिकी फसलों की ओर कदम बढ़ाया और गेंदा फूल की खेती को अपनाया।
धान बनाम गेंदा, मुनाफे का बड़ा फर्क
पहले आनंदराम सिदार 10 क्विंटल धान का उत्पादन करते थे, जिससे उन्हें कुल 31 हजार रुपए की आय होती थी। लागत निकालने के बाद उनके पास केवल 22 हजार रुपए का शुद्ध लाभ बचता था। यह आमदनी उनके परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। लेकिन जैसे ही उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदा की खेती शुरू की, उनकी आय का पूरा गणित ही बदल गया और मुनाफा कई गुना बढ़ गया।
तकनीक और मार्गदर्शन ने बदली तस्वीर
वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग ने आनंदराम सिदार को उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। राष्ट्रीय बागवानी मिशन की गेंदा क्षेत्र विस्तार योजना के तहत मिले इस सहयोग ने उनकी खेती को नई दिशा दी। परिणामस्वरूप उन्होंने लगभग 44 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन किया और इसे बेचकर 3 लाख रुपए से अधिक की आमदनी हासिल की। यह बदलाव सिर्फ आय में ही नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी साफ झलकता है।
एक किसान से बने पूरे क्षेत्र के प्रेरणास्रोत
आनंदराम सिदार की इस सफलता ने आसपास के किसानों के लिए नई राह खोल दी है। जहां पहले किसान धान की खेती तक सीमित थे, वहीं अब वे गेंदा और अन्य फूलों की खेती को एक बेहतर विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। आनंदराम खुद बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें जोखिम का डर जरूर था, लेकिन सही मार्गदर्शन और समय पर देखभाल ने उनकी मेहनत को रंग ला दिया। आज वे आत्मनिर्भर हैं और अपने परिवार को बेहतर जीवन दे पा रहे हैं।
सरकारी योजनाओं की भूमिका और भविष्य की दिशा
राष्ट्रीय बागवानी मिशन और उद्यानिकी विभाग की सक्रिय पहल ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजनाओं के तहत किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे फूलों की खेती एक स्थायी और लाभकारी व्यवसाय बनती जा रही है। रायगढ़ जिले में यह पहल न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रही है।
यह कहानी सिर्फ एक किसान की सफलता नहीं, बल्कि उस बदलते भारत की झलक है, जहां खेती अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि नवाचार और समृद्धि का माध्यम बनती जा रही है।