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आधी रात का हादसा, गंगा में समाया पिलर—बिहार की लाइफलाइन विक्रमशिला सेतु पर थमा पहिया

भागलपुर| भागलपुर की शांत रात अचानक अफरातफरी में बदल गई, जब गंगा नदी पर बना विक्रमशिला सेतु का 133 नंबर पिलर पहले धीरे-धीरे बैठा और फिर देखते ही देखते नदी में समा गया। रविवार रात 11:55 बजे शुरू हुआ यह घटनाक्रम रात 1:07 बजे पूरी तरह ढहने के साथ भयावह रूप ले चुका था। यह सिर्फ एक पुल का हिस्सा टूटना नहीं था, बल्कि बिहार की उस जीवनरेखा पर चोट थी, जिस पर रोज लाखों लोगों की आवाजाही निर्भर करती है।

समय रहते सतर्कता, टल गया बड़ा हादसा
जैसे ही पिलर में गड़बड़ी के संकेत मिले, पुल पर तैनात पुलिसकर्मियों ने बिना देर किए अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रभावित हिस्से और आसपास के इलाके को खाली करा लिया गया। यही वजह रही कि जब पुल का स्लैब गंगा में गिरा, तब कोई वाहन उसके साथ नीचे नहीं गया। इस त्वरित सतर्कता ने एक बड़े हादसे को टाल दिया और किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।

कुछ ही मिनटों में बेकाबू हो गई स्थिति
भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण पुल के शुरुआती हिस्से में धंसाव के बाद करीब 33 मीटर लंबा हिस्सा गंगा में समा गया। रात 11:50 बजे सस्पेंशन में गैप देखा गया और इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए। 12:10 बजे यातायात पुलिस मौके पर पहुंची और 12:15 बजे एहतियातन दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। इसके कुछ ही देर बाद, रात 12:50 बजे पुल का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

इंजीनियरों ने जताई मरम्मत की चुनौती
घटना के बाद मौके पर पहुंचे इंजीनियरों ने स्पष्ट किया कि करीब 33 मीटर हिस्से को गंभीर क्षति पहुंची है। इस नुकसान की मरम्मत आसान नहीं होगी और इसे ठीक करने में कम से कम 15 से 20 दिन का समय लग सकता है। तब तक इस मार्ग पर यातायात बहाल होना मुश्किल है, जिससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ने वाली है।

प्रशासन ने संभाली कमान, तुरंत रोका गया ट्रैफिक
रेंज आईजी विवेक कुमार के निर्देश पर एसएसपी प्रमोद कुमार यादव और नवगछिया एसपी राजेश कुमार ने तत्काल ट्रैफिक रोकने का आदेश दिया। भारी वाहनों को घोघा, सबौर, जगदीशपुर और केजरेली में ही रोक दिया गया ताकि शहर के भीतर जाम की स्थिति न बने। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव और जिलाधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पुल को पूरी तरह खाली कराकर सील कर दिया गया।

लंबा जाम और बढ़ती परेशानी
पुल बंद होने के बाद दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। अचानक यातायात बाधित होने से यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन और एनएच विभाग की टीमें लगातार हालात का आकलन कर रही हैं और वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में जुटी हैं।

पहले ही मिल चुके थे खतरे के संकेत
यह हादसा अचानक नहीं हुआ। करीब एक महीने पहले ही पिलरों के प्रोटेक्शन वॉल के खिसकने और क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई थी। गंगा की तेज धारा लगातार पुल के ढांचे को कमजोर कर रही थी। विशेषज्ञों ने तब ही चेतावनी दी थी कि अगर समय रहते मरम्मत नहीं की गई, तो बड़ा नुकसान हो सकता है।

लाइफलाइन पर संकट, संपर्क लगभग ठप
विक्रमशिला सेतु को बिहार की लाइफलाइन कहा जाता है। यह पुल भागलपुर और नवगछिया के बीच प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे रोजाना एक लाख से अधिक लोग गुजरते हैं। इस पुल के प्रभावित होने से दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क लगभग ठप हो गया है, जिससे आम जनजीवन पर सीधा असर पड़ा है।

मरम्मत में लापरवाही बनी बड़ी वजह
जानकारी के अनुसार पिछले आठ वर्षों से पुल की समुचित मरम्मत नहीं की गई थी। प्रोटेक्शन वॉल के क्षतिग्रस्त होने के बावजूद समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अगर समय रहते मरम्मत होती, तो शायद यह भयावह स्थिति टाली जा सकती थी।

इतिहास और महत्व, अब और हुआ स्पष्ट
करीब 4.7 किलोमीटर लंबे इस पुल का उद्घाटन वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने किया था। यह पुल भागलपुर को कोसी-सीमांचल सहित राज्य के कई हिस्सों से जोड़ता है। आज जब इसका एक हिस्सा ढह गया है, तब इसकी अहमियत और भी ज्यादा महसूस की जा रही है।

अधिकारियों का बयान और वैकल्पिक व्यवस्था
एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि पिलर संख्या 133 का स्लैब टूटकर गंगा में गिर गया है, जिससे आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पुलिस की सतर्कता से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। ट्रैफिक को सुल्तानगंज होते हुए मुंगेर की ओर डायवर्ट किया जा रहा है और इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

जिला अधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी ने कहा कि गैप की सूचना मिलते ही ट्रैफिक रोक दिया गया था और कुछ ही देर बाद पुल का हिस्सा नदी में समा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना की जांच कराई जाएगी और सुबह होने के बाद स्थायी वैकल्पिक मार्ग पर निर्णय लिया जाएगा।

अंतिम दृश्य: सवालों के बीच ठहरी हुई राहें
गंगा के बहते पानी में समाया यह पिलर सिर्फ एक ढांचा नहीं था, बल्कि उन हजारों यात्राओं का सहारा था जो अब ठहर गई हैं। फिलहाल प्रशासन राहत और वैकल्पिक व्यवस्था में जुटा है, लेकिन यह हादसा एक बड़ा सवाल छोड़ गया है—क्या समय रहते चेतावनियों पर ध्यान दिया गया होता, तो यह संकट टल सकता था? 
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