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अल नीनो की आशंका पर केंद्र अलर्ट, मंत्री बोले किसान हितों की सुरक्षा सर्वोच्च

नईदिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने दक्षिण-पश्चिम मानसूनसंभावित अल नीनो प्रभावजल उपलब्धताबीज व्यवस्थाफसल रणनीति और राज्यों की तैयारियों की आज दिल्ली में विस्तृत समीक्षा की। इस उच्चस्तरीय बैठक में शिवराज सिंह ने निर्देश दिए हैं कि केंद्र के सभी संबंधित विभाग और राज्य सरकारें पूरी गंभीरतासमन्वय और अग्रिम योजना के साथ काम करेंताकि किसी भी प्रतिकूल मौसमीय स्थिति में किसान को समय पर सलाहउपयुक्त बीजवैकल्पिक फसल विकल्पनमी संरक्षण और जल प्रबंधन की सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि किसानों को घबराने की जरूरत नहीं हैक्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में सरकार पूरी सतर्कता के साथ तैयारी कर रही है और लक्ष्य यह है कि मौसम की चुनौती का असर खेत और किसान पर न्यूनतम रहे।

कृषि भवननई दिल्ली में आयोजित कृषि एवं किसान कल्याण विभाग सहित सभी संबंधित विभागों की समीक्षा बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और संभावित अल नीनो प्रभाव को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी की जाएं। बैठक में मौसम पूर्वानुमानजल उपलब्धताफसलों की स्थितिबीज एवं अन्य कृषि आदानों की व्यवस्थाराज्यों की तैयारियों और संभावित प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में बताया गया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने की संभावना जताई है और मौसमी वर्षा देशभर में दीर्घकालीन औसत के लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है। साथ ही यह संकेत भी दिया गया कि मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती हैइसलिए केंद्र सरकार ने पहले से तैयारी तेज कर दी है और राज्यों को सतर्क मोड में रहने को कहा है।चौहान ने स्पष्ट किया कि मौसम संबंधी पूर्वानुमानों को पूरी गंभीरता से लिया जा रहा हैलेकिन किसानों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासबेहतर जल प्रबंधनउन्नत तकनीकसिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जलवायु-सहनशील कृषि उपायों के कारण संभावित चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

बैठक में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा गया कि वर्तमान समय में देश के जलाशयों का जलस्तर संतोषजनक है और समग्र भंडारण सामान्य से बेहतर स्थिति में है। उपलब्ध आकलन के अनुसार जलाशयों का भंडारण इस अवधि के सामान्य स्तर के 127.01 प्रतिशत पर हैजिससे खरीफ मौसम में सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी और नमी की कमी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि अब चुनौती केवल वर्षा पूर्वानुमान की नहींबल्कि उससे जुड़ी जमीनी तैयारी की है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन राज्यों और जिलों में कम वर्षालंबा ड्राई स्पेल या अल नीनो का अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना हैवहां विशेष निगरानीसतत समीक्षा और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिला स्तर तक आकस्मिक योजनाएं सक्रिय की जाएं और कंटिन्जेंसी प्लान को केवल कागजी कार्यवाही  माना जाए। ऐसी योजनाएं स्थानीय स्थितिउपलब्ध जलफसल पैटर्नबीज की स्थितिबुवाई प्रगतिवर्षा अंतराल और जिला-विशिष्ट जोखिमों को ध्यान में रखकर लागू की जाएंताकि किसानों को व्यवहारिक और समयबद्ध समाधान मिल सके।

सरकार का जोर क्षेत्र-विशिष्ट और फसल-विशिष्ट रणनीति अपनाने पर है। कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को समय पर सलाहबीजसंसाधन और विकल्प उपलब्ध कराए जाएंताकि जहां आवश्यकता हो वहां वैकल्पिक फसलदेरी से बुवाई की रणनीति और सूखा-सहनशील किस्मों को तुरंत बढ़ावा दिया जा सके।

बीज उपलब्धता के विषय पर बैठक में बताया गया कि खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए बीज उपलब्धता आवश्यकता से अधिक है तथा आकस्मिक स्थितियों के लिए राष्ट्रीय बीज रिजर्व की व्यवस्था भी रखी गई है। इस तैयारी का उद्देश्य यह है कि यदि किसी क्षेत्र में प्रतिकूल मौसम का असर दिखाई देतो वहां वैकल्पिक बीज और उपयुक्त किस्में तुरंत उपलब्ध कराई जा सकें। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने बीज की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि खराब या कमजोर बीज की स्थिति में कम वर्षा का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता हैइसलिए राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों तक प्रमाणितउपयुक्त और उपयोगी बीज पहुंचे तथा जरूरत पड़ने पर पुनर्बुवाई के लिए कम अवधि वाली और कम पानी में तैयार होने वाली किस्मों की व्यवस्था रहे।

चौहान ने ग्रामीण विकास तंत्र और संबंधित एजेंसियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि खेत में नमी बनाए रखनेपानी रोकनेजल-संरक्षणखेत-तालाबस्थानीय संरचनाओं और उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर तुरंत काम किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि वर्षा कम भी होतो नमी संरक्षण और जल प्रबंधन के प्रभावी उपायों से काफी हद तक फसल को बचाया जा सकता है।

जलाशयों के पानी के उपयोग के विषय पर शिवराज सिंह ने कहा कि जहां पानी उपलब्ध हैवहां उसका वैज्ञानिकसंतुलित और प्राथमिकता-आधारित उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नहर प्रणाली के अंतिम छोर तक पानी पहुंच रहा है या नहींकमांड एरिया में जल का उपयोग किस प्रकार हो रहा है और सीमित जल से अधिकतम फसल एवं अधिकतम किसानों को किस तरह सुरक्षा दी जा सकती हैइस पर राज्यों को स्पष्ट सलाह दी जानी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि दोतीन या चार सप्ताह का वर्षा-अंतराल बनता हैतो उसके लिए भी पहले से स्पष्ट रणनीति होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में पुनर्बुवाईजीवनरक्षक सिंचाईकम अवधि वाली फसलेंवैकल्पिक बुवाई योजना और जिला-विशिष्ट सलाह किसानों तक समय पर पहुंचनी चाहिए।

बैठक में रोग और कीट प्रबंधन को भी विशेष महत्व दिया गया।केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने निर्देश दिए कि मौसमीय बदलावनमी के असंतुलन या वर्षा अंतराल की स्थिति में कौन-कौन से रोग और कीट प्रकोप बढ़ सकते हैंइसकी अग्रिम पहचाननिगरानी और उपचार संबंधी सलाह पहले से तैयार की जाए और उसे तेजी से राज्यों तथा किसानों तक पहुंचाया जाए।

चौहान ने कहा कि अब सरकार के पास पर्याप्त डेटातकनीकी प्लेटफॉर्म और संचार व्यवस्था उपलब्ध हैइसलिए किसानों तक सीधे मोबाइल संदेशसलाहचेतावनी और फसल संबंधी जानकारी पहुंचाने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर के तंत्रकॉल सेंटरस्थानीय अधिकारियों और डिजिटल माध्यमों को जोड़कर ऐसा सिस्टम विकसित किया जाएजिससे किसान तक सही समय पर सही सलाह पहुंच सके।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों की तैयारियों की निरंतर समीक्षा की जाए और यह देखा जाए कि कौन से राज्य बेहतर तैयारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं तथा किन राज्यों को अतिरिक्त सहयोगहस्तक्षेप या मार्गदर्शन की आवश्यकता है। जहां प्रतिक्रिया धीमी हो या तैयारी अपेक्षाकृत कमजोर होवहां केंद्र सरकार सक्रिय समन्वय के माध्यम से स्थिति को मजबूत करने का प्रयास करेगी।

 

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