दिल्ली में यमुना के लिए उतरा जनसैलाब: 28 घाटों पर चला मेगा सफाई अभियान
2026-06-15 07:53 AM
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नई दिल्ली| यमुना को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाने के संकल्प के साथ रविवार को दिल्ली में एक अभूतपूर्व जनअभियान देखने को मिला। राजधानी के 28 घाटों और तटीय क्षेत्रों पर एक साथ मेगा क्लीनिंग ड्राइव आयोजित की गई, जिसमें सरकार, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और हजारों स्वयंसेवकों ने मिलकर यमुना की सफाई का जिम्मा उठाया। इस अभियान की अगुवाई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की, जिन्होंने स्वयं घाट पर पहुंचकर सफाई अभियान में भाग लिया और लोगों को नदी संरक्षण का संदेश दिया।
उद्देश्य सिर्फ सफाई नहीं, जनजागरण भी
दिल्ली सरकार ने यमुना तट स्वच्छता अभियान 2026 के तहत इस महाअभियान को केवल एक सफाई कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जन आंदोलन का स्वरूप देने की कोशिश की। सरकार का लक्ष्य यमुना को स्वच्छ बनाने के साथ-साथ लोगों में यह जागरूकता पैदा करना भी है कि नदी की सफाई केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की साझी जिम्मेदारी है। अभियान में मंत्रियों, विधायकों, भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और हजारों स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
गीता कॉलोनी घाट पर खुद उतरीं मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता गीता कॉलोनी घाट पहुंचीं और सफाई अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हुईं। उन्होंने स्वयं कचरा हटाया और नागरिकों व स्वयंसेवकों के साथ मिलकर यमुना तट की सफाई की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार है। उनका कहना था कि यदि हम स्वयं यमुना को प्रदूषित करेंगे तो पूजा-अर्चना और धार्मिक आस्था का उद्देश्य भी अधूरा रह जाएगा।
प्रदूषण की तस्वीर ने खड़े किए सवाल
अभियान के दौरान यमुना तटों से बड़ी मात्रा में टूटी हुई मूर्तियां, देवी-देवताओं के वस्त्र, प्लास्टिक में बंधी पूजा सामग्री, फूल-मालाएं और अन्य प्रकार का कचरा निकाला गया। मुख्यमंत्री ने इसे समाज के सामने एक गंभीर चेतावनी बताया। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि लोगों को अपनी आदतों और व्यवहार में बदलाव लाना होगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे यमुना में किसी भी प्रकार का कचरा, प्लास्टिक, पूजा सामग्री या मूर्तियां प्रवाहित न करें।
22 किलोमीटर तक चला सफाई का अभियान
मुख्यमंत्री के अनुसार राजधानी में यमुना के लगभग 22 किलोमीटर लंबे तटीय क्षेत्र में हजारों लोगों ने एक साथ सफाई अभियान चलाकर जनभागीदारी का प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान एक दिन का कार्यक्रम नहीं है। दिल्ली सरकार आगे भी नियमित रूप से ऐसे अभियान चलाती रहेगी और नागरिकों को लगातार इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से एक दिन दिल्लीवासी यमुना का स्वच्छ और अविरल स्वरूप अवश्य देखेंगे।
यमुना पुनर्जीवन के लिए मिशन मोड में सरकार
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान और पर्यावरण संरक्षण के विजन से प्रेरित होकर दिल्ली सरकार यमुना पुनर्जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि यमुना में गिरने वाले प्रदूषण को रोकने, सीवेज प्रबंधन को मजबूत बनाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मिशन मोड में काम किया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि यमुना पुनर्जीवन और जल प्रबंधन से जुड़ी 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। अमृत योजना के तहत नजफगढ़ क्षेत्र में 860 करोड़ रुपये की लागत से 12 नए डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं ताकि सीवेज का पानी नजफगढ़ ड्रेन और यमुना में जाने से रोका जा सके। इसके अलावा केशोपुर एसटीपी के उन्नयन, वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण से जुड़ी कई परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है।
28 घाटों पर एक साथ दिखा सफाई का संकल्प
यह महाअभियान चिल्ला गांव घाट, निजामुद्दीन घाट, ठोकर नंबर-14 गीता कॉलोनी घाट, ठोकर नंबर-18 गांधी नगर घाट, पुराना लोहे का पुल घाट, सिग्नेचर ब्रिज-वजीराबाद घाट, जीरो पुश्ता राधा-कृष्ण घाट, ढाई पुश्ता घाट, चौथा पुश्ता घाट, कालिंदी कुंज घाट, आईटीओ घाट, राम घाट, काली घाट, श्याम घाट, सूरघाट, वासुदेव घाट, रेलवे ब्रिज अपस्ट्रीम, आईटीओ डाउनस्ट्रीम, आईटीओ अपस्ट्रीम, सराय काले खां, यमुना बैंक, ठोकर नंबर-13, कुदेसिया घाट, निगम बोध घाट, वजीराबाद के नीचे पूर्वी तट, सिग्नेचर ब्रिज के पश्चिमी तट, मयूर विहार यमुना खादर और कालिंदी कुंज डाउनस्ट्रीम सहित कुल 28 स्थानों पर एक साथ आयोजित किया गया। इन सभी जगहों पर 500 से अधिक सामाजिक और स्वयंसेवी संगठनों, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने सफाई अभियान में हिस्सा लिया।
यमुना के नाम ली गई सामूहिक प्रतिज्ञा
अभियान के दौरान मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को यमुना स्वच्छता का सामूहिक संकल्प भी दिलाया। लोगों ने प्रतिज्ञा की कि वे पूजा सामग्री, फूल-मालाएं और मूर्तियां नदी में प्रवाहित नहीं करेंगे, पॉलीथीन और सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करेंगे, किसी भी प्रकार का कचरा नदी में नहीं फेंकेंगे और दूसरों को भी यमुना संरक्षण के लिए जागरूक करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना को पुनः निर्मल और अविरल बनाने का रास्ता जनभागीदारी से होकर ही गुजरता है।
सफाई अभियान से आगे की असली चुनौती
दिल्ली में एक दिन में हजारों लोगों का यमुना के लिए सड़क पर उतरना निश्चित रूप से सकारात्मक संकेत है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह उत्साह कुछ घंटों की सफाई तक सीमित रहेगा या लोगों की रोजमर्रा की आदतों में भी बदलाव लाएगा? यमुना की असली लड़ाई घाटों पर जमा कचरे से नहीं, बल्कि उस सोच से है जो नदी को आज भी कूड़ेदान समझती है। जब तक यह सोच नहीं बदलेगी, तब तक हर सफाई अभियान के बाद यमुना फिर उसी मोड़ पर खड़ी दिखाई दे सकती है, जहां से उसे बचाने की कोशिश आज भी जारी है।