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पूर्ण सूर्यग्रहण लगा दिन में छाया अंधेरा....कनाडा में ब्लैकआउट देखने सुबह 5 बजे से लाइन में लोग

डेस्क | सूर्य ग्रहण एक तरह का ग्रहण है जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है तथा पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण अथवा आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा आच्छादित होता है।

इस साल का पहला और अद्भुत सूर्य ग्रहण लग चुका है। चैत्र नवरात्र शुरू होने से 1 दिन पहले पूर्ण सूर्य ग्रहण लगा है, जिसका प्रभाव देश, दुनिया और जनमानस पर भी पड़ता है।। यह पूर्ण सूर्यग्रहण है, जो 54 साल के बाद लगा। आज का सूर्य ग्रहण बेहद खास था। ये काफी लंबा सूर्य ग्रहण रहा। इससे पहले इस तरह का सूर्य ग्रहण साल 1970 में लगा था। साल के पहले चंद्र ग्रहण की तरह ही सूर्य ग्रहण को भी भारत से नहीं देखा जा सका। ज्योतिष विद्या में सूर्य ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है। अप्रैल माह की सोमवती अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगा। भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है, तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का छाया कुछ समय के लिए ढक जाता है, इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। 

यह सूर्य ग्रहण बेहद दुर्लभ था। इस सूर्य ग्रहण से के देशों के कुछ हिस्सों में दिन में ही अंधेरा छा गया।। कहा जाता है कि ऐसा ग्रहण देखने का मौका जीवन में शायद एक बार ही मिलता है। अमेरिका में कई जगह यह ग्रहण दिखाई दिया, लेकिन नासा के अनुसार टॉरियोन, मैक्सिको में सबसे लंबे समय तक के लिए ग्रहण देखा गया। 

मैक्सिको में सोमवार सुबह 11 बजते ही (भारतीय समय अनुसार सोमवार रात करीब 10 बजे) सूर्य ग्रहण की शुरुआत हुई। ग्रहण की एंट्री सबसे पहले मैक्सिको के 603 किलोमीटर में फैले इस्ला सोकोरो आईलैंड में एंट्री हुई। वहां पूरी तरह अंधेरा छा गया था। इसके बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण अमेरिका से होते हुए कनाडा भी पहुंचा। 54 देशों में आंशिक सूर्य ग्रहण लगा। सोमवार को लगे सूर्य ग्रहण का भारत में कोई असर नहीं दिखाई दिया, क्योंकि ग्रहण जब शुरू होगा उस वक्त भारत में रात थी।

अक्सर चाँद, सूरज के सिर्फ़ कुछ हिस्से को ही ढ़कता है। यह स्थिति खण्ड-ग्रहण कहलाती है। कभी-कभी ही ऐसा होता है कि चाँद सूरज को पूरी तरह ढँक लेता है, इसे पूर्ण-ग्रहण कहते हैं। पूर्ण-ग्रहण धरती के बहुत कम क्षेत्र में ही देखा जा सकता है। ज़्यादा से ज़्यादा दो सौ पचास (250) किलोमीटर के सम्पर्क में। इस क्षेत्र के बाहर केवल खंड-ग्रहण दिखाई देता है। पूर्ण-ग्रहण के समय चाँद को सूरज के सामने से गुजरने में दो घण्टे लगते हैं। चाँद सूरज को पूरी तरह से, ज़्यादा से ज़्यादा, सात मिनट तक ढँकता है। इन कुछ क्षणों के लिए आसमान में अंधेरा हो जाता है, या यूँ कहें कि दिन में रात हो जाती है | 

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