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जाने : लोकसभा में कौन सांसद कहां बैठते है कैसे होता है तय ?

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार सरकार बनाने जा रहे हैं | नरेंद्र मोदी 9 जून की शाम को शपथ ग्रहण करेंगे | जानकारी के मुताबिक इस दौरान कैबिनेट के मंत्री और सांसद भी शपथ लेंगे | संसद में पक्ष और विपक्षी दल कहां बैठते हैं, ये कैसे तय करते है |  क्या कोई सांसद कहीं पर भी बैठ सकता है |  संविधान में इसके लिए भी नियम दिए गये हैं | लोकसभा में अध्यक्ष तय करते हैं कि कौन सा सदस्य कहां पर बैठेगा | संसद में पारंपरिक व्यवस्था के तहत सत्ता पक्ष के लोग एक तरफ बैठेंगे और विपक्ष के लोग दूसरी तरफ बैठते हैं |  

भारतीय संविधान में लोकसभा सदस्यों की अधिकतम संख्या 552 तय की गई थी | इसमें से 530 सदस्य अलग - अलग राज्यों से चुनकर आते थे, वहीं 20 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए रिजर्व रहती है | दो सीटें एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए निर्धारित थीं, जिन पर राष्ट्रपति सदस्यों को मनोनीत करते थे | अब यह व्यवस्था खत्म हो चुकी है | अभी लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या 543 है |  

लोकसभा में सामान्य तौर पर स्पीकर के दायीं ओर की कुर्सियों पर सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्य बैठते हैं | वहीं विपक्षी सांसद स्पीकर के बायीं ओर की सीटों पर बैठते हैं | स्पीकर के सबसे आगे एक टेबल पर लोकसभा सचिवालय के सभी अफसर बैठते हैं, जो सदन में दिन भर की कार्यवाही का पूरा लेखा-जोखा रिकॉर्ड करते हैं | 

लोकसभा में प्रक्रिया और संचालन के नियम 4 के मुताबिक लोकसभा सदस्य स्पीकर द्वारा निर्धारित किए गए, नियम के अनुसार ही बैठते हैं | इस सम्बन्ध में जरूरी निर्देश क्लॉज 122(ए) में दिए गए हैं | इसी क्लॉज से स्पीकर को यह अधिकार मिलता है कि वह किसी पार्टी की लोकसभा में सीटों की संख्या के आधार उसके सदस्यों के लिए बैठने की जगह तय करता है |व्यवस्था करते समय स्पीकर इस बात का ध्यान रखते हैं कि वरिष्ठ सदस्यों को आगे की ओर बैठने की जगह मिले | चाहे वो किसी भी दल के सदस्य हो सकते हैं |  

नए संसद भवन के लोकसभा कक्ष में 888 सांसदों के बैठने की व्यवस्था की गई है | वहीं राज्यसभा में 384 सदस्य बैठ सकते हैं | लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र के लिए नये संसद भवन में एक साथ 1272 सदस्यों के बैठने की पूरी व्यवस्था हो सकती है | 

वर्तमान में लोकसभा सदस्यों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर हुए परिसीमन पर आधारित है | उस समय से इन सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं किया गया है और साल 2026 के पहले इसमें बदलाव हो भी नहीं सकता है | बढ़ती आबादी और कई राज्यों में जनसंख्या के हिसाब से लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है | इसलिए संभावना जताई जा रही है कि 2026 के बाद देश में नया परिसीमन हो और सदस्यों की संख्या बढ़े | इसीलिए नए संसद भवन में अधिक सांसदों के बैठने की व्यवस्था की गई है, जिसे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है |  

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